Breaking News

एम्स ऋषिकेश में आयोजित कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी (सीडीएस) के सातवें वार्षिक सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा मधुमेह (डायबिटीज) में नियंत्रण रखते हुए जीवन में सुधार लाने हेतु व्यापक चर्चा की

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड

एम्स ऋषिकेश : एम्स ऋषिकेश में आयोजित कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी (सीडीएस) के सातवें वार्षिक सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा मधुमेह (डायबिटीज) में नियंत्रण रखते हुए जीवन में सुधार लाने हेतु व्यापक चर्चा की गयी। देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञों ने आपस में अपने अनुभव साझा किए और मधुमेह को हृदय रोगों के लिए खतरा बताया।

सम्मेलन के पहले दिन शोध प्रस्तुतियों के अलग-अलग 6 सत्र आयोजित किए गए। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि संस्थान के डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन चिकित्सकों को नवीनतम साक्ष्य साझा करने और सर्वोत्तम पद्धतियों को मरीजों तक पहुंचाने में मदद करते हैं। उन्होंने इंसुलिन की खोज के महत्व और चिकित्सक व नर्सिंग देखभाल की भूमिका को रेखांकित किया। मेडिसिन के विभागाध्यक्ष और सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष प्रो. रविकांत ने मधुमेह को हृदय रोग का एक प्रमुख जोखिम कारक बताते हुए कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी के माध्यम से मधुमेह और हृदय देखभाल के लिए समेकित दृष्टिकोण लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार से इन बीमारियों पर नियंत्रण संभव है और इनसे बचा जा सकता है। कार्यक्रम को चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत धमीजा ने भी संबोधित किया।

सम्मेलन मे विभिन्न क्षेत्रों से आए चिकित्सा विशेषज्ञ डाॅ. के बालामुरूगेशन ने जोखिम आंकलन मे नॉन ग्लाइसेमिक मार्कर, डाॅ. नवल विक्रम ने एडिपोसिटी-बेस्ड कार्डियो मेटाबाॅलिक डिसऑर्डर, डाॅ. प्रीति ढोट ने महिलाओं में हृदय रोग, डाॅ. भरत माहेश्वरी ने बुजुर्गों के पोषण आंकलन, डाॅ. सच्चिदानंद तिवारी ने मधुमेह की नयी दवाओं और डाॅ. नवदीप ने नवजात मधुमेह पर व्याख्यान दिए। इस दौरान मेडिसिन विभाग के डाॅ. वेंकटेश पाई, डाॅ. मुकेश बैरवा, डाॅ. पी.के. पांडा, डाॅ. दरब सिंह, डाॅ. अखिलेश कुमार सहित काॅलेज ऑफ नर्सिंग की प्रिन्सिपल प्रो. स्मृति अरोड़ा, डाॅ. रोहित रैना, डाॅ. ऋतु, डाॅ. सुनील मिश्रा और डाॅ. संजय शाह आदि कई मौजूद रहे।

आयोजित सत्रों के दौरान चिकित्सा विशेषज्ञों ने मधुमेह रोगियों और महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम, बुजुर्गों का संतुलित पोषण और शुगर के लक्ष्य तथा नवजात शिशुओं में मधुमेह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। इस दौरान कई विशेषज्ञों ने कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं स्टैटिन को मेटाबोलिक सिंड्रोम में देने, इंसुलिन के नए विकल्पों को तलाशने और गठिया व अन्य ऑटोइम्यून रोगों पर भी विचार साझा किए। इसके साथ ही सम्मेलन में टाइप-2 मधुमेह की संपूर्ण देखभाल पर भी पैनल चर्चा की गई।

Check Also

40वीं वाहिनी पीएसी, हरिद्वार में डांडिया नाइट का भव्य आयोजन

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड हरिद्वार : 40वीं वाहिनी पीएसी, हरिद्वार में दिनांक 23 अक्टूबर 2026 को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *