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परमार्थ निकेतन से आदरणीय श्री सी. पी. राधाकृष्णन जी को उपराष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होने पर हार्दिक शुभकामनायें

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड

ऋषिकेश * ऋषियों की तपोभूमि, माँ गंगा के तट और हिमालय की दिव्य गोद से, परमार्थ निकेतन, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने पर आदरणीय श्री सी. पी. राधाकृष्णन जी को शुभकामनाएँ दी।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज भारतमाता का सौभाग्य है कि श्री सी. पी. राधाकृष्णन जी जैसे राष्ट्रनिष्ठ, कर्मयोगी और जनसेवक उपराष्ट्रपति पद पर सुशोभित हैं। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रहित, राष्ट्र प्रथम और राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम की भावना से ओत-प्रोत रहा है। यह भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है।

स्वामी जी ने कहा कि श्री राधाकृष्णन जी का व्यक्तित्व हिमालय की तरह ऊँचा और आदर्शों से ओतप्रोत है। हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, शांति और धैर्य का जीवंत प्रतीक है। ठीक उसी प्रकार हमारे नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जी भी अपने दृढ़ संकल्प, जनसेवा और स्वच्छ छवि के कारण समाज में आदर्श प्रस्तुत करते रहे हैं।

उन्होंने 1970 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सक्रिय राजनीति प्रारंभ की। 1974 में भारतीय जनता पार्टी (जनसंघ) के राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य बने। बाद में भाजपा के सदस्य के रूप में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभायी। वर्ष 2023 में झारखंड के राज्यपाल बने, अतिरिक्त जिम्मेदारियों में तेलंगाना और पुदुचेरी में नियुक्ति रही तथा वर्ष 2024 में महाराष्ट्र के राज्यपाल नियुक्त हुये और अब भारत का सौभाग्य है कि अब वे भारत के उपराष्ट्रपति हैं।

स्वामी जी ने कहा कि श्री राधाकृष्णन जी का दीर्घ सार्वजनिक अनुभव, भारतीय संस्कृति और परंपराओं से गहरा जुड़ाव, न केवल संसद को बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र को नई दिशा देगा। हम आशा करते हैं कि आपका कार्यकाल राष्ट्रनिर्माण, जनकल्याण, और भारत के भविष्य में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

इस अवसर पर परमार्थ निकेतन में भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। स्वामी जी ने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी, अद्वितीय राष्ट्रनायक, ओजस्वी वक्ता और समाज सुधारक पं. गोविंद बल्लभ पंत जी के त्याग और तप ने स्वतंत्र भारत की नींव को सुदृढ़ किया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने भारतीय राजनीति और समाज को नई दिशा दी। उनका जीवन हमें निरंतर राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और समाजोत्थान के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता रहेगा।

स्वामी जी ने कहा कि भारत की विशेषता उसकी जड़ें हैं, संस्कृति, परंपरा, और आध्यात्मिक चेतना है। जब भी भारत के नेतृत्व में ऐसे व्यक्तित्व आते हैं जो भारतीय मूल्यों से गहराई से जुड़े होते हैं, तब केवल राजनीति नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होता है।

भारत, आज विश्व में आशा और शांति का मार्गदर्शक है। हमें विश्वास है कि श्री राधाकृष्णन जी का कार्यकाल ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को और सशक्त करेगा तथा भारत को वैश्विक मंचों पर और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएगा।

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