Breaking News

भारत नेपाल की मैत्री तथा विश्व कल्याण की भावना से शंखनाद स्वामी हरिकृष्ण महाराज

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड

हरिद्वार / प्रेम नगर आश्रम रानीपुर मोड हंस पवन घाट पर श्री हरि कृपा फाऊंडेशन के तत्वाधान में विश्व शांति हेतु सामूहिक शंखनाद कर एकता तथा अखंडता का संदेश दिया गया इस अवसर पर बोलते हुए कथा व्यास विदुषी देवी भवानी ने कहाप्राचीन काल से शंख को केवल एक वाद्य या धार्मिक उपकरण के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि यह एक चेतावनी, प्रेरणा और सामूहिक ऊर्जा का प्रतीक रहा है। शंख की गूंज में शक्ति, जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना का संदेश छिपा है। जब शंखनाद सुनाई देती है, तो यह केवल कानों में गूंजती नहीं, बल्कि मानव मन और समाज में सामूहिक चेतना और एकता की भावना उत्पन्न करती है।

सामूहिक शांति की आवश्यकता / आज के आधुनिक युग में जहां तनाव, असहमति और संघर्ष आम बात हो गए हैं, वहां सामूहिक शांति की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। शांति केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे समाज, राष्ट्र और विश्व स्तर पर होनी चाहिए। जब लोगों के मन में हिंसा, द्वेष और असहमति नहीं होती, तब समाज में स्थायित्व और विकास संभव होता है।

शंखनाद: चेतना और संकल्प का प्रतीक / शंख की गूंज यह स्मरण कराती है कि सभी लोग एक समान उद्देश्य के लिए मिलकर काम करें। यह हमें याद दिलाती है कि शक्ति केवल बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प और सकारात्मक ऊर्जा में निहित है। शंखनाद की गूंज जैसे समूचे समाज को जागृत करती है, वैसे ही सामूहिक प्रयास भी समाज में सद्भाव, सहयोग और भाईचारे की भावना फैलाते हैं।

सामूहिक प्रयास और शांति / सामूहिक प्रयास का अर्थ है—समाज के प्रत्येक सदस्य का मिलकर किसी नेक उद्देश्य के लिए काम करना। जब हर व्यक्ति अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज की भलाई के लिए कदम बढ़ाता है, तो शांति और सुरक्षा का वातावरण स्वतः निर्मित होता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और समान अवसरों के लिए सामूहिक कार्य से समाज का विकास और समृद्धि सुनिश्चित होती है।

शांति, सुख और समृद्धि की स्थापना

शांति: आपसी समझ, सहिष्णुता और प्रेम से।

सुख: मानसिक संतोष, सहयोग और सामाजिक न्याय से।

समृद्धि: मिलकर प्रयास करने, संसाधनों का सही उपयोग करने और एक-दूसरे की मदद करने से।

शंखनाद की गूंज केवल एक संगीत नहीं, बल्कि यह सामूहिक चेतना और जिम्मेदारी का प्रतीक है। जब समाज के लोग इस संदेश को अपनाते हैं और सामूहिक संकल्प से शांति, सुख और समृद्धि के लिए कार्य करते हैं, तो न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियाँ भी सुरक्षित, खुशहाल और सशक्त बनती हैं। यही शंखनाद का वास्तविक संदेश है—एकता, चेतना और सामूहिक प्रयास से विश्व में स्थायी शांति की स्थापना। के साथ-साथ विश्व में ईश्वर की अनुकंपा तथा शांति की स्थापना होती है

इस अवसर परमहंत रवि देव शास्त्री महाराजमहंत हरिहरानंद महाराज महंत दिनेश दास महाराज निधि राणा उपाध्यक्ष भाजपा श्री राजेश लखेडा श्रीमती सावित्री देवी हेमा पंडित राकेश उपाध्याय शास्त्री टहल दास भवन सहित भारी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे

Check Also

रोड़ीबेलवाला क्षेत्र से 50 से अधिक अस्थायी अतिक्रमण हटाए, नगर निगम का अभियान जारी

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड हरिद्वार: नगर आयुक्त नंदन कुमार के निर्देशानुसार नगर निगम हरिद्वार ने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *