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भगवान राम से बड़ा राम का नाम है राम नाम की महिमा जपते जपते भवसागर पार हो जाओगे : श्री महंत रघुवीर दास महाराज

कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड

हरिद्वार /( ठाकुर मनोजानंद )श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े में भक्तजनों के बीच ज्ञान की अमृत वर्षा करते हुए प्रातः स्मरणीय गुरुदेव श्री रघुवीर दास जी महाराज ने कहाभगवान राम से भी बड़ा राम का नाम माना गया है, क्योंकि नाम और नामी में अभेद का भाव सनातन परंपरा का मूल सिद्धांत है।

राम नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह चेतन शक्ति है जिसमें स्वयं ब्रह्म का वास माना गया है। संतों ने कहा है कि जहाँ राम नाम का उच्चारण होता है, वहाँ भगवान राम स्वयं उपस्थित हो जाते हैं। नाम स्मरण सरल, सहज और सर्वसुलभ साधन है, जिसे गृहस्थ, तपस्वी, ज्ञानी और भक्त सभी समान रूप से अपना सकते हैं। राम नाम मनुष्य के अंतःकरण को शुद्ध करता है, अहंकार को गलाता है और जीवन को धर्म के पथ पर अग्रसर करता है। यही कारण है कि तुलसीदास जैसे महाकवि ने भी नाम को ब्रह्म से भी श्रेष्ठ बताया और राम नाम को भवसागर से पार लगाने वाली नौका कहा। श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा

माता जानकी और भगवान राम सनातन संस्कृति की पराकाष्ठा हैं, क्योंकि इनके जीवन में धर्म केवल उपदेश के रूप में नहीं, बल्कि आचरण के रूप में प्रकट होता है। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जिन्होंने प्रत्येक संबंध में आदर्श प्रस्तुत किया। पुत्र के रूप में पिता की आज्ञा का पालन, पति के रूप में एकनिष्ठता, भाई के रूप में प्रेम और राजा के रूप में प्रजा के प्रति उत्तरदायित्व—इन सभी गुणों का समन्वय उनके चरित्र में स्पष्ट दिखाई देता है। माता जानकी त्याग, पवित्रता, धैर्य और आत्मबल की सजीव प्रतिमूर्ति हैं। वनवास, अपहरण और अपमान जैसी कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने धर्म और मर्यादा का मार्ग नहीं छोड़ा, जिससे यह सिद्ध होता है कि सनातन संस्कृति में नारी शक्ति को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।

राम और जानकी का जीवन यह सिखाता है कि धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पवित्र शैली है। सनातन संस्कृति का मूल आधार सत्य, करुणा, क्षमा, त्याग और लोककल्याण है, और ये सभी तत्व रामकथा में पूर्ण रूप से विद्यमान हैं। यही कारण है कि रामकथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली जीवन-दृष्टि है। पीढ़ी दर पीढ़ी रामकथा ने मानव को यह सिखाया है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।

हिंदुत्व की आत्मा इन्हीं मूल्यों में निहित है, जो राम और जानकी के जीवन से उद्भासित होते हैं। हिंदुत्व का अर्थ केवल किसी एक पंथ या पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सांस्कृतिक चेतना है, जो सभी के कल्याण की भावना को केंद्र में रखती है। राम राज्य की कल्पना में भी यही भाव दिखाई देता है, जहाँ न्याय, समानता और करुणा का शासन होता है। राम नाम इस चेतना को जाग्रत रखने का साधन है, जो मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराता है और उसे आत्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

अतः यह कहा जा सकता है कि राम नाम, माता जानकी और भगवान राम सनातन संस्कृति के केवल प्रतीक नहीं, बल्कि उसके प्राण हैं। राम नाम का स्मरण व्यक्ति को भीतर से बदल देता है, जानकी का आदर्श उसे सहनशील बनाता है और राम का चरित्र उसे धर्मपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। इन्हीं मूल्यों के कारण सनातन संस्कृति आज भी जीवित है और हिंदुत्व की आत्मा के रूप में सम्पूर्ण मानवता को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाती चली आ रही है।

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