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दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कराया युग निर्माण सत्संकल्प का पाठ

कमल अग्रवाल (हरिद्वार )उत्तराखंड

हरिद्वार / गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा वर्ष 1926 में स्थापित अखंड दीपक आज भी शांतिकुंज में अनवरत प्रज्वलित है, मानो एक शताब्दी से मानव चेतना की धड़कन बनकर। यह अखंड ज्योति केवल दीप-शिखा नहीं, बल्कि तप, त्याग और साधना से उपजी वह दिव्य चेतना है, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को सतत आलोकित कर रही है। इसी पावन परंपरा को युगधारा में प्रवाहित करते हुए शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने श्रद्धा, मर्यादा और गरिमा से परिपूर्ण वातावरण में अखंड दीपक की अग्नि से प्रज्वलित दिव्य दीये, पावन गुरुसत्ता के चरण पादुका को शांतिकुंज से समारोह स्थल बैरागी द्वीप लेकर पहुंचे। इस ऐतिहासिक क्षण में हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर दिव्य ज्योति का भावविभोर स्वागत किया तथा श्रद्धासिक्त होकर दर्शन-प्रणाम किया।

अखंड दीपक के पावन सान्निध्य में हजारों साधकों एवं परिजनों ने सामूहिक उपासना में सहभागिता की। वातावरण मंत्रोच्चार, साधना और श्रद्धा की तरंगों से गुंजायमान हो उठा। यह अखंड ज्योति युग-परिवर्तन का उद्घोष, साधना की निरंतरता और राष्ट्र-जागरण का मौन किंतु सशक्त संदेश देती है। इसकी लौ प्रत्येक हृदय में आत्मबोध, कर्तव्य और नवसंकल्प की ज्योति प्रज्वलित करती है।

इस अवसर पर दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने युग निर्माण सत्संकल्प का पाठ कराते हुए कहा कि यह हम सभी के लिए अत्यंत गौरव और सौभाग्य का क्षण है कि हम युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी की अखंड साधना के शताब्दी वर्ष के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1926 में वसंत पंचमी के पावन पर्व पर पूज्य गुरुदेव द्वारा स्थापित अखंड दीपक अज्ञान से ज्ञान की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का शाश्वत संदेश देता है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि गुरुदेव का ‘युग निर्माण संकल्प’ कराया। जो आत्म-परिष्कार और समाज के नव निर्माण का अडिग संकल्प है, जिसे साकार करना ही इस शताब्दी वर्ष की सच्ची साधना और सार्थकता है।

वहीं समारोह में उत्कृष्ट सेवा करने वाले स्वयंसेवकों को श्रद्धेया शैलदीदी एवं समारोह के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया।

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