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हरिद्वार में आपदा प्रबंधन तैयारियों को परखने हेतु पांच जगहों पर मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक संपन्न

कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड

हरिद्वार / आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाओं को परखने एवं तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज बुधवार को हरिद्वार जनपद की तीन तहसीलों में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशन में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, हरिद्वार द्वारा मॉक अभ्यास का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।

इस मॉक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न आपदा परिदृश्यों—बाढ़, अग्निकांड एवं भगदड़ की घटनाओं—में संबंधित विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग का परीक्षण करना था। अभ्यास के अंतर्गत राहत एवं बचाव कार्यों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप पाँच अलग-अलग स्थानों पर आपदा की घटनाओं के बनावटी परिदृश्य तैयार कर सर्च, रेस्क्यू एवं राहत की गतिविधियाँ संचालित की गईं। इसमें पुलिस, अग्निशमन विभाग, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड्स, पीआरडी, लोनिवि सहित अनेक विभागों एवं अन्य संबंधित एजेंसियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

मॉक अभ्यास के अंतर्गत हरकी पैड़ी क्षेत्र में अचानक गंगा जी का जल स्तर बढ़ने के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने तथा वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं/यात्रियों में भगदड़ मचने का बनावटी परिदृश्य तैयार किया गया। इस दौरान बाढ़ से भवनों को नुकसान पहुँचने तथा कई लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना दर्शाई गई। दूसरा परिदृश्य शिवपुल, हरकी पैड़ी के निकट, भगदड़ के कारण त्श्रद्धालुओं के नदी में गिरने का था।

तीसरा परिदृश्य मनसा देवी पैदल मार्ग में वनाग्नि की घटना पर आधारित था, जहाँ आग लगने से भगदड़ की स्थिति उत्पन्न होने और कई लोगों के घायल होने की सूचना आपातकालीन परिचालन केंद्र को प्राप्त हुई। चौथा परिदृश्य तहसील लक्सर के अंतर्गत गंगदासपुर में तटबंध टूटने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने का था, जिसमें कई लोगों के फँसे होने की सूचना प्राप्त हुई। इसी प्रकार पाँचवाँ परिदृश्य तहसील रुड़की क्षेत्र में गंगा नदी में बाढ़ के कारण गंगा नहर में लोगों के बहने की घटना से संबंधित था, जिसमें रेस्क्यू अभियान का अभ्यास किया गया।

इन सभी घटनाओं की सूचनाएँ जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को पूर्वाह्न 10:20 बजे के बाद मिलनी शुरू हुईं। सूचना प्राप्त होते ही जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशानुसार आपदा प्रबंधन हेतु जिला स्तर पर गठित इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) को तत्काल सक्रिय किया गया। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) पी.आर. चौहान को जिला स्तर से राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी तथा संबंधित तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को इंसीडेंट कमांडर नामित करते हुए पूर्ण क्षमता एवं तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए।

तहसील स्तर पर स्थापित स्टेजिंग एरिया से राहत एवं बचाव दलों को आवश्यक उपकरणों एवं चिकित्सा टीमों के साथ घटनास्थलों के लिए रवाना किया गया। टीमों ने मौके पर पहुँचकर त्वरित कार्रवाई करते हुए फँसे लोगों को सुरक्षित निकाला तथा घायलों को उपचार हेतु नजदीकी राहत केंद्रों एवं अस्पतालों में पहुँचाया। सभी स्थानों पर राहत एवं बचाव कार्य निर्धारित मानकों एवं एसओपी के अनुरूप समयबद्ध तरीके से संपादित किए गए।

मॉक ड्रिल के दौरान जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, जिला विकास अधिकारी वेद प्रकाश, परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी, अर्थ एवं संख्याधिकारी नलिनी ध्यानी सहित आईआरएस से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।

रुड़की तहसील में मॉक ड्रिल का संचालन इंसीडेंट कमांडर संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ एवं उपजिलाधिकारी अनिल शुक्ला के नेतृत्व में किया गया, जबकि हरिद्वार तहसील में मॉक ड्रिल के इंसीडेंट कमांडर उपजिलाधिकारी जितेन्द्र कुमार रहे।

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