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श्री शंकर शरण यति जी महाराज की पुण्यतिथि पर कांगड़ी में विशाल संत भंडारे का भव्य आयोजन

कमल अग्रवाल( हरिद्वार) उत्तराखंड

हरिद्वार ( ठाकुर मनोज मनोजानंद) प्रसिद्ध कांगड़ी ग्राम में परम पूज्य श्री शंकर शरण यति जी महाराज की पतित-पावन पुण्यतिथि के पावन अवसर पर उनके भक्तों एवं श्रद्धालुओं द्वारा विशाल संत भंडारे का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस पुण्य अवसर पर दूर-दूर से संत महापुरुषों, श्रद्धालुओं तथा ग्रामवासियों ने उपस्थित होकर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और संत परंपरा की महिमा का गुणगान किया।कार्यक्रम में मुख्य रूप से जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय सभापति महंत प्रेम गिरि जी महाराज ने अपने पावन विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संत महापुरुषों का संपूर्ण जीवन समाज, धर्म और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित होता है। संत केवल अपने लिए नहीं जीते, बल्कि वे समस्त सृष्टि के कल्याण की भावना लेकर लोकमंगल के कार्यों में निरंतर लगे रहते हैं। उनके तप, त्याग, साधना और सेवा का प्रभाव समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है।उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या, करुणा और सेवा का जीवंत स्वरूप होता है। संत महापुरुष अपने आचरण से यह शिक्षा देते हैं

कि इस अवसर पर महामंडलेश्वर श्री संजय गिरी महाराज ने कहामानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं का उत्थान नहीं, बल्कि समस्त समाज के हित में कार्य करना है। संतों की वाणी में अमृत होता है और उनके सान्निध्य से मनुष्य का जीवन पवित्र एवं सार्थक बनता है। जिस भूमि पर संतों का चरण पड़ता है, वह भूमि भी पावन और पुण्यमयी हो जाती है।इस पावन आयोजन को प्रतिवर्ष संपन्न कराने में श्री सीताराम जी के अथक प्रयास और समर्पण की विशेष भूमिका रही। उनके सतत प्रयासों एवं सेवा भावना के माध्यम से यह विशाल भंडारा प्रत्येक वर्ष श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित होता आ रहा है, जिससे संत सेवा और जनसेवा की परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है।कार्यक्रम के दौरान संत महापुरुषों का आशीर्वचन, भजन-कीर्तन एवं प्रसाद वितरण का आयोजन भी हुआ। भंडारे में हजारों की संख्या में ग्रामवासी, श्रद्धालु एवं संत समाज उपस्थित रहा।

संपूर्ण वातावरण भक्तिमय, आध्यात्मिक और श्रद्धा से ओतप्रोत दिखाई दियापुण्यतिथि के इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने परम पूज्य श्री शंकर शरण यति जी महाराज के श्रीचरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके दिखाए गए धर्म, सेवा और साधना के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह आयोजन संत परंपरा की महानता, गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा और सनातन संस्कृति की जीवंतता का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आया। इस अवसर पर श्री विकास चंदोला सीताराम जी दीपक चोपड़ा संजय सचिन शर्मा विजय सिंह चौहान मनीष डंडरियाल सहित भारी संख्या में स्थानीय नागरिक तथा हजारों की संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे

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