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प्रथम वार्ता में ही एस पी रेखा यादव ने अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल को दी थी मामले के संदिग्ध होने की जानकारी; आयोग की निरंतर निगरानी में सामने आया सच

कमल अग्रवाल ( हरिद्वार) उत्तराखंड

चम्पावत/देहरादून : जनपद चम्पावत के कथित नाबालिग से दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस की एसआईटी (SIT) जांच के उपरांत सामने आए तथ्यों पर उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अध्यक्ष ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल एसपी चम्पावत रेखा यादव से दूरभाष पर वार्ता कर वस्तुस्थिति की समीक्षा की थी। उस प्रथम वार्ता के दौरान ही एसपी रेखा यादव ने अध्यक्ष को अवगत कराया था कि घटना के प्राथमिक साक्ष्य और परिस्थितियां मेल नहीं खा रहे हैं, जिससे प्रकरण में किसी गहरे षड्यंत्र की प्रबल आशंका है। अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश थे कि जांच की निष्पक्षता और वैज्ञानिक शुद्धता से कोई समझौता न किया जाए। पुलिस व जांच टीमों द्वारा तकनीकी विवेचना सीसीटीवी फुटेज, सीडीआर और फॉरेंसिक रिपोर्ट के सूक्ष्म विश्लेषण के माध्यम से यह प्रमाणित हो गया कि पूरी घटना रंजिश के तहत बुना गया एक निंदनीय षड्यंत्र थी।

विवेचना के दौरान यह अत्यंत विचलित करने वाला तथ्य सामने आया कि कमल रावत नामक व्यक्ति ने अपने व्यक्तिगत प्रतिशोध और रंजिश की पूर्ति हेतु एक नाबालिग बालिका की मासूमियत का दुरुपयोग किया। अध्यक्ष ने इस कृत्य की घोर निंदा करते हुए कहा कि “एक नाबालिग को झूठा प्रलोभन देकर और उसे बहला-फुसलाकर जघन्य अपराध का मोहरा बनाना न केवल कानूनी रूप से अपराध है, बल्कि यह उस बालिका के भविष्य और समाज की नैतिक चेतना पर भी गहरा प्रहार है।” निजी बदले के लिए कानून को ढाल बनाकर निर्दोष व्यक्तियों को सामाजिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की यह कोशिश सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।

अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने स्पष्ट किया कि महिला आयोग जहाँ महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़ा है, वहीं वह कानून के इस प्रकार के दुस्साहसिक दुरुपयोग के विरुद्ध भी उतनी ही कठोरता से कार्यवाही सुनिश्चित करेगा। आयोग ने पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि चूंकि अब यह सिद्ध हो चुका है कि मामला पूर्णतः मनगढ़ंत था, अतः मुख्य षड्यंत्रकारी कमल रावत और इस साजिश में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संलिप्त सभी व्यक्तियों के विरुद्ध विधि के अनुसार ऐसी कठोरतम कार्यवाही की जाए जो भविष्य के लिए एक मिसाल बने।

आयोग की अध्यक्ष ने यह भी कहा कि न्याय की शुचिता बनाए रखना आयोग का संवैधानिक दायित्व है और वह इस पूरे मामले के अंतिम विधिक निस्तारण तक अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही सुनिश्चित की जानी चाहिए जो व्यक्तिगत रंजिश और साजिशों के माध्यम से देवभूमि के शांत वातावरण और सौहार्दपूर्ण माहौल को खराब करने का कुप्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार और महिला आयोग महिला सुरक्षा के विषय पर अत्यंत संवेदनशील हैं; अतः किसी भी बेटी के सम्मान, निर्दोष की गरिमा और कानून की मर्यादा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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