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कथा व्यास श्रीराम मन्दिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरि जी के श्रीमुख से भागवत ज्ञान धारा प्रवाहित

कमल अग्रवाल (हरिद्वार )उत्तराखंड

ऋषिकेश / देवभूमि ऋषिकेश में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने वाला दिव्य महोत्सव है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भक्तिभाव से उपस्थित होकर श्रीमद्भागवत महापुराण की अमृतमयी ज्ञानगंगा में स्नान कर रहे हैं।

श्रीमद्भागवत कथा का रसपान श्रद्धालुओं को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष, प्रख्यात विद्वान पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज के श्रीमुख से प्राप्त हो रहा है। पूज्य स्वामी जी अत्यंत सरल, मधुर एवं ओजस्वी शैली में श्रीमद्भागवत के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों, भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के संदेशों को जनमानस तक पहुंचा रहे हैं। उनके श्रीमुख से प्रवाहित भागवत ज्ञानधारा श्रद्धालुओं के अंतःकरण को भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से आलोकित कर रही है।

कथा के पावन अवसर पर देश के अनेक पूज्य संतों और आध्यात्मिक विभूतियों का सान्निध्य इस आयोजन की गरिमा को और अधिक दिव्य बना रहा है। पूज्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज का पावन आशीर्वाद और आध्यात्मिक उद्बोधन श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की मूल भावना से जोड़ रहा है। उनके प्रेरक संदेशों ने भारतीय संस्कृति की महानता, वेदों की प्रासंगिकता और धर्ममय जीवन की आवश्यकता को अत्यंत प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि काम करते रहो, नाम जपते रहो, सेवा करते रहो, काम बन जायेगा। नफरत से बचो, प्रेम सबसे करो, बाँटते ही रहो, साथ क्या जायेगा।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि ”श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को प्रेम, सेवा, करुणा, सद्भाव और ईश्वर से जोड़ने वाला दिव्य मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भागवत कथा मानवता को आंतरिक शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर रही है। पूज्य स्वामी जी ने युवाओं से भारतीय संस्कृति, संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का आह्वान भी किया।

संत श्री मुरलीधर जी महाराज ने भी कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जहां भागवत कथा होती है, वहां वातावरण स्वतः ही पवित्र, सकारात्मक और दिव्य बन जाता है। कथा श्रवण मनुष्य के जीवन को नई दिशा देता है तथा उसे धर्म, प्रेम और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है।

इस दिव्य आयोजन के यजमान एवं कथा आयोजक श्री राजेन्द्र कुमार मुंदड़ा, श्री पवन कुमार मुंदड़ा एवं उनका सम्पूर्ण परिवार अत्यंत श्रद्धा, समर्पण और भक्तिभाव से कथा श्रवण कर रहा है। परिवार द्वारा किए जा रहे सेवा, सत्कार और आयोजन की व्यवस्था में भारतीय संस्कृति की अतिथि देवो भवः की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।

देवभूमि ऋषिकेश में आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा भारतीय सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक एकता का अनुपम उदाहरण है। ऐसी दिव्य कथाएं भारत की सनातन संस्कृति की आत्मा हैं, जो युगों-युगों से मानवता को प्रकाश, प्रेरणा और परमात्मा से जुड़ने का मार्ग दिखाती रही हैं।

कथा आयोजक श्री राजेन्द्र कुमार मुंदड़ा एवं पवन कुमार मुंदड़ा अंगवस्त्र प्रदान कर पूज्य संतों का अभिनन्दन किया।

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