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मन को तीर्थ और आस्था को मंदिर और ईमानदारी को ईश्वर की अनुभूति बनाकर मनुष्य जीवन सफल कर सकता है *परम पूज्य चिन्मयानन्द बापू

कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड

जनपद हरिद्वार *भूपतवाला भागीरथी नगर स्थित चिन्मयानंद धाम में देश के प्रख्यात कथा व्यास राष्ट्र संत परम पूज्य श्री चिन्मयानंद बापू ने भक्त जनों के बीच ज्ञान की अमृत वर्षा करते हुए कहा मनुष्य का यह मन किसी तीर्थ से कम नहीं होता अगर मनुष्य चाहे तो अपने मन में ईश्वर भक्ति का उदय कर उसे तीर्थ बना सकता है जिसके मन में ईश्वर भक्ति दया भाव और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव बसा हो उसका मन किसी तीर्थ से कम नहीं होता अगर मनुष्य अपने मन के विकारों को दूर कर उस में ज्ञान और भक्ति का उदय कर ले तो इससे बड़ा तीर्थ कोई और हो ही नहीं सकता मनुष्य मन को तीर्थ और आस्था को मंदिर और ईमानदारी को ईश्वर की अनुभूति मानकर अपने जीवन को धन्य कर सकता है जीभ और शब्द दो अनमोल तोफे मनुष्य के जीवन में होते हैं बहुत से लोग इसके माध्यम से बहुत सारा संतोष और सुख कमा सकता है और दूसरों को दे सकता है और बहुत से इसी के माध्यम से अपने जीवन का सुकून और सब कुछ गवा सकते हैं जीवन में दूसरों को दिया गया सम्मान और बोले गये कुछ अच्छे शब्द दूसरे के जीवन में हमेशा के लियें आपकी महत्वपूर्ण भूमिका बना सकते हैं अगर कोई आपको जीवन में ना समझे तो कोई बात नहीं क्योंकि अच्छे लोग और अच्छी किताबें हर किसी की समझ में नहीं आती

इसी प्रकार हमारे धर्म ग्रंथ पवित्र श्री रामायण जी श्री राम चरित्र मानस जैसे पावन पुनीत ग्रंथों में लिखी गई पावन कल्याणकारी बातें हर किसी की समझ में नहीं आती क्योंकि इस मानव जीवन को सार्थक करना हर किसी की किस्मत में नहीं होता राम नाम का रसपान जीवन में जो कर लेता है वह भवसागर पार हो जाता है और गाय माता की सेवा जो जीवन में कर लेता है मानो जीवन में एक अमूल्य निधि अर्जित कर ली है हरि भजन मनुष्य जीवन की एक अमूल्य निधि है जिसे साधु संतों की संगत भजन पाठ पूजा और कथा आदि के श्रवण करने से अर्जित कर इस मानव जीवन को धन्य तथा सार्थक किया जा सकता है

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