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ईश्वर भक्ति और श्रीमद् भागवत कथा भक्त और भगवान के बीच सेतु का कार्य करती महामण्डलेश्वर कथा व्यास * पुनीत गिरी महाराज

कमल अग्रवाल (हरिद्वार )उत्तराखंड

हरिद्वार 2 अप्रैल( वरिष्ठ पत्रकार ठाकुर मनोजानन्द )भूपतवाला स्थित कबीर आश्रम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास परम पूज्य 1008 महामण्डलेश्वर पुनीत गिरी जी महाराज ने आज भक्तजनों के बीच अमृत रूपी ज्ञान की वर्षा करते हुए बड़ा सुंदर भजन सुनाया खुल गये सारे ताले वाह क्या बात हो गयी तुमसे ब्रज में कन्हैया मुलाकात हो गई जिसे सुनकर सभी श्रोतागण झुमने गाने नाचने लगे संम्पूर्ण वातावरण भक्ति मय हो उठा

उन्होंने कहा ईश्वर भक्ति भक्त और भगवान के बीच कथा सेतु का कार्य करती है आज कथा के दौरान कन्हैया जी का जन्म हुआ इस अवसर पर बोलते हुए कथा व्यास परम पूज्य महामंडलेश्वर 1008 श्री पुनीत गिरी जी महाराज ने कहा जड़ अपने आप में कुछ नहीं है शुन्य के सामान है जिसे परमात्मा ने स्पर्श किया है वह जड़ कैसे हो सकता है वह सब साकार है चैतन्य है जिसके मन में हृदय में भक्ति का वास हो जो ईश्वर की भक्ति में खोया हुआ हो उसका जीवन तो स्वयं ही सार्थक हो जाता है हमारे धर्म ग्रंथ तथा पावन कथाये इस पृथ्वी लोक पर इस मानव जीवन को सार्थक करने का मार्ग है

श्रीमद् भागवत कथा वह जीवन कल्याण सुधा रस है जिसके श्रवण करने मात्र से यह मानव जीवन धन्य और सार्थक हो जाता है मनुष्य के जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि की वर्षा होती है उसके पूर्वजों को सद्गति प्राप्त होती है

दत्तात्रेय जी का दृष्टांत सुनते हुए परम पूज्य महाराज जी ने बताया जब उन्होंने पिंगला से पूछा कि तुम्हारा जीवन अनुभव क्या है उसी के आधार पर वेदव्यास जी ने 18 पुराणो की रचना की ईश्वर ने धर्म तथा संस्कृति की रक्षा हेतु इस पृथ्वी लोक पर अवतरित हुए इसी में भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा का दृष्टांत सुनते हुए महाराज जी ने कहा जब एक छोटे कद के बालक के रूप में भगवान वामन राजा बलि की यज्ञशाला में पहुंचे तो उन्हें देखकर उनकी कद काठी तथा स्वरूप देखकर वहां सभी लोग अचंभित हो उठे राजा बलि ने वामन अवतार का हाथ जोड़कर सत्कार किया तथा उनसे आने का प्रयोजन पूछा उन्होंने तीन पग भूमि दिए जाने की राजा से मांग की जिसे देखकर छोटे-छोटे पग तीन पग में यह कितनी भूमि नाप लेंगे महाराज बलि अचंभित हुए उनके गुरु शुक्राचार्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से पहचान लिया की वामन के रूप में स्वयं भगवान विष्णु आये हुए हैं उन्होंने बलि को उन्हें दान देने से रोकने का प्रयास किया राजा बलि ने बड़े ही सुंदर शब्दों में गुरु शुक्राचार्य जी को कहा बिना गुरु में नहीं देख पाता की द्वार पर आज संपूर्ण जगत को देने वाला संपूर्ण जगत का पालनहार आया है हे सतगुरु आपका बारम्बार धन्यवाद नहीं तो मैं उन्हें पहचान नहीं पता कि मेरे द्वार पर साक्षात हरि आये हैं राजा बलि ने हाथ में जल लेकर उन्हें तीन पग भूमि देने का संकल्प लिया भगवान बामुन ने तो पग में संपूर्ण सृष्टि को नाप दिया और राजा बलि से पूछा कि अब तीसरा पग कहां रखूं तो राजा बलि ने अपना शीश उनके सामने किया कि मेरे शीश पर रखिये और तब भगवान हरि ने प्रकट होकर कहा मैं तो तुम्हें लूटने आया था और तुमने मुझे ही लूट लिया तो भक्ति हो तो ऐसी की राक्षाश कुल में पैदा होने के बाद भी उन्होंने अपने जीवन को ईश्वर को समर्पित कर दिया

इस अवसर पर जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर परम पूज्य 1008 श्री स्वामी यतींद्रानन्द महाराज ने कहा उस परमात्मा ने 84 कोटि योनियों में मनुष्य को धर्म के रूप में स्थापित किया है यह मानव शरीर 84 कोटि योनियों में नहीं है यह इससे भिन्न है इसीलिये पशुओं को उसे परमात्मा ने सब कुछ सीख कर साकार करके भेजा है अगर आप किसी कुत्ते को या अन्य जीव को किसी नदी में छोड़ दे तो वह डूबेगा नहीं वह तैरने लगेगा क्योंकि उस परमात्मा ने उसे सीखा कर भेजा है उसके अंदर वह क्षमता पूर्व से ही विकसित की है मनुष्य को बुद्धि के साथ विवेक दिया है अगर वह चाहे तो वह भी सब कुछ सीख सकता है इस जीवन को सार्थक कर सकता है ईश्वर भक्ति करते हुए अपने मानव जीवन को धन्य कर सकता है

इस अवसर पर बोलते हुए महामंडलेश्वर स्वामी ललितानन्द महाराज ने कहा हमारे पावन ग्रंथ और पावन कथाये ईश्वर की प्रेरणा से रचित वह पावन सुधा रस है जिसके सुनने और और सत्य के मार्ग पर चलने मात्र से यह मानव जीवन सार्थक हो जाता है इस अवसर पर महंत प्रमोद दास महाराज आचार्य रघुनंदन जी श्री सच्चिदानन्द शास्त्री सहित अनेको संत महापुरुष उपस्थित थे

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