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परमार्थ निकेतन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का विश्राम

💥परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद व प्रेरक संदेश से गद्गद हुये साधक

🔥कथाव्यास म म श्री कनकेश्वरी देवी जी के श्रीमुख से प्रवाहित हो रही पावन ज्ञान धारा का आज विश्राम

🌸विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य के लिए हाथ में हाथ और दिल से दिल जोड़ने का संकल्प

💥जहाँ सहयोग, समानता और सम्मान होता है, वहाँ भोजन और जीवन का वास्तविक पोषण होता है

कमल अग्रवाल (हरिद्वार उत्तराखंड

ऋषिकेश * परमार्थ निकेतन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य विश्राम हुआ। सभी आयोजकों और साधकों के लिये यह क्षण से आध्यात्मिक अनुभूति से युक्त रहा।

कथा का प्रवाह कथाव्यास श्री कनकेश्वरी देवी जी के श्रीमुख से निरंतर चल रहा था, जो आज विश्राम पर पहुँची। साधकों ने इस पावन ज्ञानधारा के विश्राम को एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में ग्रहण किया, और प्रभु के प्रति अपनी श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव को सुदृढ़ किया।

इस दिव्य अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, और साध्वी भगवती सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद और प्रेरक संदेश सभी को प्राप्त हुआ। स्वामीजी और साध्वीजी ने साधकों को जीवन को उच्चतम आध्यात्मिक मूल्यों धर्म, कर्म, भक्ति, सेवा और मानवता की ओर प्रेरित करने का संदेश दिया।

आज विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भोजन सुरक्षा की ओर सब का ध्यान आकर्षित करते हुये कहा कि “बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य’’ के लिए सभी को हाथ में हाथ और दिल से दिल जोड़ना होगा।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जहाँ सहयोग, समानता और सम्मान होता है, वहाँ भोजन और जीवन का वास्तविक पोषण होता है। यह केवल भौतिक संतोष नहीं, बल्कि आत्मिक समृद्धि और समाज में न्याय की पहचान है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त, पौष्टिक और सुरक्षित भोजन मिले। हमारी सेवा केवल पेट भरने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह हृदय और आत्मा तक पहुँचने वाली करुणा की साधना हो। हम ध्यान रखें कि भंडारा के माध्यम से भोजन सेवा तो हो पर भोजन की बर्बादी न हो। अपने घरों और भंडारा में भी भोजन का सम्मान करेंगे, अपव्यय को कम करेंगे, और जरूरतमंदों तक पौष्टिक भोजन पहुँचाने में भी सक्रिय योगदान देंगे।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि भोजन केवल भौतिक पोषण का माध्यम नहीं है। यह हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारे धर्म का प्रतीक है। अन्न को माता समान मानते हुए हमें उसका सम्मान करना चाहिए। भारतीय संस्कृति में भोजन को अन्नपूर्णा माता कहा गया है। प्रत्येक थाली में संतुलन, कृतज्ञता और संयम होना चाहिए। संतुलित जीवन, नैतिकता और आध्यात्मिक समृद्धि केवल भोजन में नहीं, बल्कि उसके माध्यम से उत्पन्न सेवा भाव और करुणा में भी निहित है।

कथा व्यास म म श्री कनकेश्वरी देवी जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन गंगा जी के पावन तट पर पूज्य स्वामी जी महाराज के पावन सान्निध्य में कथा का गायन व श्रवण दोनों ही सौभाग्य से प्राप्त होते हैं। भागवत कथा न केवल कथा सुनने का अनुभव है, बल्कि यह जीवन को उच्चतम मूल्यों, करुणा और मानवता की राह पर ले जाने वाला दिव्य मार्गदर्शन है। गंगा के पावन तट से आप सभी गंगा जल के साथ जीवन के मूल व मूल्य भी साथ लेकर जायें और उन्हें अपने परिवारों में रोपित करें।

कथा आयोजक श्रीमती करूणाबेन प्रागजी भाई पटेल, श्री प्रागजी भाई नारण भाई पटेल, विशाल, मितल श्रेया, जैमिन, धरती, ईशान, निष्ठा पिनाक और अहमदाबाद गुजरात से पधारे मित्र व परिवार जनों ने गद्गद मन व कृतज्ञता के साथ परमार्थ निकेतन से विदा ली।

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