मजदूर विरोधी लेबर कोड्स के खिलाफ प्रदर्शन व कोड्स की प्रतियां दहन
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November 23, 2025
कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड
जनपद हरिद्वार / हरिद्वार में इंकलाबी मजदूर केंद्र और संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार के नेतृत्व चार लेबर कोड्स को लागू करने के विरोध में बीएचईएल सेक्टर चार चौराहे पर प्रदर्शन कर नई श्रम संहिताओं की प्रतियां आग के हवाले की गयी।
संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के संयोजक एवं फूड्स श्रमिक यूनियन आईटीसी के महामंत्री गोविंद सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने मजदूरों पर चार श्रम संहिताएं लागू करके बहुत बड़ा हमला कर दिया है। इसका मजदूर वर्ग अपने एकजुटता और संघर्ष से मुंह तोड़ जवाब देगा ।
इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी पंकज कुमार ने कहा कि मोदी सरकार ने देशी और विदेशी पूंजीपतियों के मुनाफे को ध्यान में रखकर कोरोना कल में ये चार श्रम संहिताओं को संसद से पास किया ,जिन्हें 21 नवंबर 2025 से लागू कर दिया गया है ये 7% संगठित क्षेत्र के मजदूरों के जीवन को और बर्बादी की ओर ले जाएंगे ,छटनी वह तालाबंदी की छूट मालिकों को मिल गई है । यूनियन बनाने का अधिकार कठिन कर दिया गया है।
प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की नीता ने कहा कि इन श्रम संहिताओं में मोदी सरकार ने महिलाओं को रात की पाली में काम करने की अनुमति दे दी है जिससे महिलाओं पर अपराध और ज्यादा बढ़ेंगे। जहां दिन में महिला सुरक्षा नहीं थी अब रात की पाली में काम करने की बाध्यता से पूरे समाज में भी परेशानी पैदा होगी।
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयोजक नासीर अहमद ने कहा कि मोदी सरकार एक तरफ हिंदू राष्ट्र की बात करती है और दूसरी तरफ हिंदू मजदूरों के हक अधिकारों को खत्म करती है।
प्रगतिशील भोजन माता संगठन की उपाध्यक्ष रजनी ने कहा कि मोदी सरकार ढोंग करती है समान काम का समान वेतन की। स्कीम वर्कर्स के साथ बेगारी कराती है भोजन माताओं को मात्र ₹3000 महीने का मानदेय देकर उनकी जिंदगी बर्बाद करती है। एवरेडी मजदूर यूनियन के महामंत्री अनिल कुमार ने कहा कि अंबानी अडानी को सारी संपदा देकर मोदी सरकार मजदूरों के खिलाफ काले कानून ला रही है ।
भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के महामंत्री अवधेश कुमार ने कहा कि मोदी सरकार सरकारी संपत्तियों को अडानी अंबानी को कौड़ियों के दाम बेच रही है। और निजीकरण उदारीकरण की नीतियों लाकर शिक्षा व स्वास्थ्य भी गरीब आदमी के हाथ से दूर होता जा रहा है।
कर्मचारी संघ सत्यम ऑटो के चन्द्रेश ने कहा कि कारखाने में एफटीए और नैप्स में काम करने वाले मजदूरों का पीएफ व ईएस आई भी नहीं काटा जा रहा है।अंत में वक्ताओं ने सामुहिक रूप से इस बात को कहा कि 14 दिसंबर को हरिद्वार में मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा)के बैनर तले एक बड़ा प्रदर्शन और रैली का आयोजन किया जाएगा और मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को रद्द कराने, ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ व न्यूनतम वेतन ₹30,000 प्रतिमाह करने एवं सार्वजनिक उपक्रमों का नीजिकरण पर रोक लगाने की मांगे प्रमुख रूप से रहेंगी।
प्रदर्शन करने के बाद चारों श्रम संहिताओं की प्रतियों का दहन किया गया। प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केंद्र के जय प्रकाश,अंकुश, दीपक भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के सत्यवीर ,रंजन, ब्रजराज ,किर्बी श्रमिक कमेटी के कृष्ण मुरारी ,नरेश कुमार, विजेन्द्र कुमार ,मन्नु शाह, अरुण कुमार,राजीव देवभूमि श्रमिक संगठन के सुरेश राम, जितेंद्र कुमार फूड्स श्रमिक यूनियन आईटीसी के देवेंद्र सिंह एवरेडी मजदूर यूनियन के पीतांबर ध्यानी, संजीव कुमार कर्मचारी संघ सत्यम ऑटो के महिपाल बलवंत, कृष्णा, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की दीपा, प्रगतिशील भोजन माता संगठन की सोनिया, कौशल्या पूनम आदि उपस्थित रहे।