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परमार्थ निकेतन दर्शनार्थ आये वित्त मंत्रालय, राज्स्व विभाग, भारत सरकार के अधिकारीगण

कमल अग्रवाल (हरिद्वार )उत्तराखंड

ऋषिकेश/ परमार्थ निकेतन के दिव्य, शांत और आध्यात्मिक वातावरण में वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का आगमन हुआ।

इस अवसर पर आईएस, त्रिपुरा, सोनल गोयल, श्रीमती अर्पणा करन, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड (कानपुर), डॉ. रेनुका जैन गुप्ता, मुख्य आयकर आयुक्त, देहरादून, तथा श्री शेवदान सिंह भदौरिया, प्रधान आयकर आयुक्त, कानपुर, श्री के. यतीश राजावत, सामाजिक कार्यकर्ता एवं सीआईपीपी के मुख्य संचालन अधिकारी (सीओओ) सपरिवार उपस्थित रहे।

इन सभी अधिकारियों ने परमार्थ निकेतन के विश्वविख्यात गंगा तट पर आयोजित पावन गंगा आरती में सहभाग कर मां गंगा के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। गंगा आरती के उपरांत सभी अतिथियों ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट की। भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर सार्थक संवाद हुआ। आज प्रशासनिक और शासकीय पदों पर आसीन अधिकारी यदि अपने कार्यक्षेत्र के साथ-साथ पर्यावरण, समाज और संस्कारों के प्रति भी सजग रहें, तो देश का चरित्र और भविष्य दोनों सशक्त होते हैं।

पूज्य स्वामी जी ने विशेष रूप से जल संरक्षण और वृक्षारोपण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “यदि हमें आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भारत देना है, तो हमें जल, जंगल और जमीन का सम्मान करना होगा। हर व्यक्ति, हर परिवार और हर संस्था को एक हरित संकल्प लेकर पृथ्वी के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

इस अवसर पर श्रीमति अर्पणा करन ने कहा कि परमार्थ निकेतन जैसे संस्थान भारत की आध्यात्मिक विरासत का जीवंत उदाहरण हैं। यहाँ का अनुशासन, पवित्रता, साधना और सेवा का वातावरण भीतर से, स्वयं से जोड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि “यहाँ आने पर लगता है कि जैसे मन को नया संबल, ऊर्जा और सकारात्मकता प्राप्त होती है।

डॉ. रेनुका जैन गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “परमार्थ निकेतन ने आध्यात्मिकता को सेवा के साथ जोड़ा है, यह संयोजन ही भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह स्थान केवल ध्यान और पूजा का स्थल नहीं, बल्कि एक जीवन का विद्यालय है जहाँ मानवता की शिक्षा मिलती है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सभी अधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “राजस्व विभाग और प्रशासनिक तंत्र देश के संचालन की रीढ़ है। जब इस तंत्र में कार्यरत व्यक्ति करुणा, ईमानदारी और सेवा भावना के साथ काम करते हैं, तब राष्ट्र की प्रगति स्वाभाविक रूप से तीव्र होती है।

अधिकारियों को पूज्य स्वामी ने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

राष्ट्र रक्षा में लगे हमारे पराक्रमी सैनिकों को सशस्त्र सेना झंडा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दी। यह दिन हमें उनके अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा को नमन करने का अवसर देता है। आइए, हम सभी उनके कल्याण, परिवारों के समर्थन और शहीद सैनिकों की स्मृति के लिए अपना योगदान दें तथा देशभक्ति और कृतज्ञता के इस भाव को हृदय में जीवित रखें।

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