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पत्रकारिता एक मिशन है किसी स्वार्थ पूर्ति का उद्देश्य नहीं सिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष : ठाकुर मनोज मनोज मनोजानंद

कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड

हरिद्वार / पत्रकारिता मिशन या स्वार्थ सिद्धि का माध्यम?एक गंभीर आत्मचिंतन”पत्रकारिता कोई व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र मिशन है।” लेकिन आज के दौर में यह परिभाषा धुंधली पड़ती जा रही है। हर गली, मोहल्ले और नुक्कड़ पर खुद को पत्रकार बताने वालों की एक ऐसी ‘भीड़’ खड़ी हो गई है, सिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष ठाकुर मनोज मनोजानंद ने कहा जिसका उद्देश्य जनसेवा नहीं, बल्कि स्वार्थ पूर्ति और धनार्जन बनकर रह गया है।

हाल ही में सिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष ठाकुर मनोज मनोजानंद ने इस गिरते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इस प्रवृत्ति की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका तर्क है कि पत्रकारिता जैसे गरिमामय क्षेत्र को कुछ लोग अपनी व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षाओं और अवैध लाभ के लिए कलंकित कर रहे हैं।पोर्टल और ऐप्स की आड़ में ‘पत्रकारिता’ का खेल

तकनीक के इस युग में मोबाइल ऐप और न्यूज पोर्टल बनाना बेहद आसान हो गया है। इसी का फायदा उठाकर कई ऐसे लोग इस क्षेत्र में घुस आए हैं, जिन्हें पत्रकारिता की मूल नैतिकता  और नियम-कानूनों का रत्ती भर भी ज्ञान नहीं है।पहचान का संकट: ये लोग प्रेस वार्ताओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में घुसकर न केवल अव्यवस्था फैलाते हैं, बल्कि वास्तविक पत्रकारों के कार्य में भी बाधा उत्पन्न करते हैं।

अवैध नियुक्तियाँ: कई पोर्टल संचालक बिना किसी योग्यता के, पैसों के बदले या अन्य लाभ के लिए अवैध तरीके से लोगों को ‘पत्रकार’ के कार्ड बांट रहे हैं। यह न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।स्वार्थ पूर्ति और धनार्जन का जरिया ठाकुर मनोज मनोजानंद  ने स्पष्ट कहा है कि जो लोग पत्रकारिता को केवल पैसा कमाने या डराने-धमकाने का माध्यम समझते हैं, वे समाज के लिए घातक हैं। पत्रकारिता का अर्थ ‘सत्य को उजागर करना’ था, न कि ‘सत्य का सौदा करना’। इस ‘नुक्कड़ पत्रकारिता’ ने मुख्यधारा की पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

कठोर कार्रवाई की आवश्यकता / अब समय आ गया है कि शासन और प्रशासन इन ‘फर्जी’ पत्रकारों और नियमों का उल्लंघन करने वाले पोर्टल संचालकों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाए।

सत्यापन: पोर्टल संचालकों और उनसे जुड़े लोगों के दस्तावेजों का गहन सत्यापन होना चाहिए।कानूनी ढांचा: केवल आरएनआई (PRGI) या सूचना विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त और नियमों के तहत चलने वाले डिजिटल माध्यमों को ही कवरेज की अनुमति मिलनी चाहिए।

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