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अर्थ आवर केवल एक घंटे का अंधकार नहीं है, बल्कि यह एक जागरूकता का प्रकाश : स्वामी चिदानन्द सरस्वती

कमल अग्रवाल (हरिद्वार)उत्तराखंड

ऋषिकेश / बढ़ते जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय संकट और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण के बीच “अर्थ आवर 2026” एक वैश्विक चेतना का संदेश लेकर आया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी मार्च के अंतिम शनिवार, आज 28 मार्च को रात 8ः30 से 9ः30 बजे तक अनावश्यक लाइट्स बंद कर पृथ्वी के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान है।

इस वर्ष की थीम “स्विच ऑफ द लाइट्स, स्विच ऑन योर रिस्पॉन्सिबिलिटी” यह केवल एक घंटे की प्रतीकात्मक पहल नहीं, बल्कि जीवनशैली में स्थायी बदलाव लाने का संकेत है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आज जब दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, जल संकट और जैव विविधता के नुकसान से जूझ रही है, ऐसे में यह अभियान हमें याद दिलाता है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। ऊर्जा की बचत, जल संरक्षण और हरित जीवनशैली अपनाकर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।

जब पूरी दुनिया तेजी से विकास की ओर बढ़ रही है, तब पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसी चुनौती के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का संदेश देने के लिए “अर्थ आवर” एक वैश्विक पहल है। एक घंटे के लिए अनावश्यक लाइट्स बंद कर, हम सभी पृथ्वी के प्रति अपने दायित्व को निभा सकते हैं।

स्वामी जी ने कहा कि अर्थ आवर केवल एक घंटे का अंधकार नहीं है, बल्कि यह एक जागरूकता का प्रकाश है, जो हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हम अपने दैनिक जीवन में प्रकृति के प्रति कितने जिम्मेदार हैं। यह एक ऐसा अवसर है, जब हम अपने व्यस्त जीवन से कुछ क्षण निकालकर संकल्प लें हैं कि हम पृथ्वी को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास हैं।

आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई, जल संकट और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, पिघलते ग्लेशियर और प्राकृतिक आपदाएं इस बात का संकेत हैं कि यदि हमने अभी से कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियों को एक असंतुलित और संकटग्रस्त पृथ्वी का सामना करना पड़ेगा।

अर्थ आवर हमें यह संदेश देता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। जब अनेक लोग एक साथ लाइट्स बंद करते हैं, तो यह केवल ऊर्जा बचाने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक संकल्प का प्रतीक बन जाता है। यदि हम अपने जीवन में थोड़े-थोड़े बदलाव लाएं जैसे ऊर्जा की बचत, पानी का संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग और पौधा रोपण तो हम पृथ्वी को एक बेहतर स्थान बना सकते हैं।

भारत, जहां प्रकृति को सदैव पूजनीय माना गया है, अर्थ आवर का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। हमारी संस्कृति हमें “प्रकृति ही परमात्मा का स्वरूप है” का संदेश देती है। नदियाँ, पर्वत, वृक्ष और जीव-जंतु, सभी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में, उनका संरक्षण करना केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी है। याद रखें पृथ्वी केवल संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि हमारा घर है, एक ऐसा घर, जिसे हमें संजोकर रखना है।

जब हम लाइट्स बंद करते हैं, तो हम केवल बिजली नहीं बचाते, बल्कि अपने भीतर एक नई चेतना को जागृत करते हैं एक ऐसी चेतना, जो हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीना सिखाती है।

आइए, इस अर्थ आवर पर हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि हम पृथ्वी के रक्षक बनेंगे, न कि केवल उपभोक्ता। “एक घंटा पृथ्वी के नाम, एक उज्जवल भविष्य के लिए” इसी भावना के साथ, आइए हम सभी इस वैश्विक अभियान का हिस्सा बनें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया का निर्माण करें।

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