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परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव कार्यक्रम का दिव्य व भव्य आयोजन

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड

ऋषिकेश/ देवभूमि ऋषिकेश स्थित विश्व विख्यात आश्रम परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव कार्यक्रम का अत्यंत दिव्य, भव्य, आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायक आयोजन किया गया। इस दिव्य आयोजन का संचालन परमार्थ सेवा समिति, मुंबई द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से आए श्रद्धालुओं, साधकों एवं भक्तों ने उत्साहपूर्वक सहभाग किया।

इस कार्यक्रम को पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ, जिनकी दिव्य उपस्थिति ने सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। गंगा तट पर गूंजते भजन, मंत्रोच्चार, यज्ञ, गंगा आरती और ‘जय श्री राम’ व ‘जय हनुमान’ के उद्घोष ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, आस्था और दिव्यता का संचार किया।

तीन दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव कार्यक्रम अदम्य साहस, अटूट भक्ति और निस्वार्थ सेवा का संदेश देने वाला पर्व है। हनुमान जी का जीवन हमें संदेश देता है कि सच्ची शक्ति बाहुबल में नहीं, बल्कि आत्मबल है तथा श्रद्धा और समर्पण में निहित होती है। उनके चरित्र में निहित निष्ठा, विनम्रता और कर्तव्यपरायणता आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इस तीन दिवसीय आयोजन के अंतर्गत विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यज्ञ, हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड का संगीतमय पाठ, भजन-कीर्तन, ध्यान-साधना एवं योग सत्रों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने भीतर की ऊर्जा को जागृत करने का अनुभव किया। गंगा तट पर आयोजित दिव्य गंगा आरती ने इस आयोजन को और भी दिव्यता प्रदान की, भक्तों की आस्था ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।

इस अवसर पर प्रख्यात लाइफ ट्रांसफॉर्मेशनल स्पीकर एवं नारी रत्न श्रीमती राजेश्वरी जी मोदी द्वारा ‘कुबेर का खजाना’ कार्यक्रम का नेतृत्व एवं मार्गदर्शन किया गया। उनके सशक्त विचारों और प्रेरणादायक सत्रों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, आत्मविश्वास विकसित करने और आंतरिक समृद्धि को पहचानने की दिशा में प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि वास्तविक ‘कुबेर का खजाना’ हमारे भीतर ही निहित है, हमारी सोच, हमारे संस्कार और हमारी सकारात्मक ऊर्जा ही हमारे जीवन को समृद्ध बनाती है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि हनुमान जी, जीवन जीने की एक प्रेरणा हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन सेवा, समर्पण और साधना का आदर्श है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपने जीवन में हनुमान जी के गुणों, निष्ठा, साहस, विनम्रता और भक्ति, को अपनाएं, तो हम न केवल अपने जीवन को सफल बना सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

स्वामी जी ने यह भी कहा कि आज के युग में, जब जीवन में तनाव, असंतुलन और भटकाव बढ़ रहा है, तब हनुमान जी का चरित्र हमें स्थिरता, शक्ति और दिशा प्रदान करता है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे अपने भीतर की शक्ति को पहचानें और उसे सकारात्मक दिशा में उपयोग करें।

इस आयोजन को सफल बनाने में परमार्थ सेवा समिति, मुंबई के सदस्यों का विशेष योगदान रहा। श्री मनोज राठी जी, श्री लक्ष्मीनारायण जी, निशा जैन जी, शशि राठी जी एवं श्री गोपाल जी ने अपनी निष्ठा, समर्पण और सेवा भाव से इस आयोजन को एक नई ऊंचाई प्रदान की। परमार्थ गंगा तट पर आयोजित इस कार्यक्रम ने साधकों के हृदय में एक अविस्मरणीय छाप छोड़ी।

तीन दिवसीय इस हनुमान जन्मोत्सव ने यह संदेश दे रहा है कि जब भक्ति और सेवा का संगम होता है, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आता है। यह आयोजन केवल एक पर्व का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मजागरण, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सशक्त पहल है।

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