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भक्ति एवं सिद्ध ऋषियों की तपोस्थली के साथ-साथ एक अनुपम श्रद्धा भक्तिका तीर्थ है सिद्ध स्रोत

कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड

हरिद्वार  (ठाकुर मनोज मनोजानंद )पावन धरा पर, कांगड़ी क्षेत्र से 3 से 4 किलोमीटर भीतर घने वनांचल के मध्य स्थित यह सिद्ध तपोस्थल और सिद्ध स्रोत प्राचीन काल से ही दिव्यता, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र रहा है। सदियों पुराने दृष्टांतों और लोकश्रुतियों में इस स्थल का विशेष उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि यह स्थान ऋषि-मुनियों, तपस्वी साधु-संतों और योगियों की तपोभूमि रहा है, जहाँ उन्होंने कठोर साधना कर दिव्य सिद्धियाँ प्राप्त कीं। प्राचीन शास्त्रों में भी वन, नदी और एकांत तपोस्थलों को देवत्व की अनुभूति का प्रमुख आधार बताया गया है। शिव पुराण में वर्णित है कि भगवान भगवान शिव स्वयं उन स्थलों पर विशेष रूप से विराजते हैं जहाँ भक्ति, तप और निःस्वार्थ सेवा का संगम होता है।

इसी पावन स्थल पर पूज्य गुरुदेव की समाधि स्थित है, जहाँ प्रतिदिन दूर-दूर से श्रद्धालु आकर सच्चे मन से माथा टेकते हैं। भक्तों की आस्था है कि जो भी श्रद्धा और विश्वास के साथ यहाँ प्रणाम करता है, उस पर भगवान भोलेनाथ तथा नंदी की विशेष कृपा बरसती है। उनकी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा वैभव का आगमन होता है। शास्त्रों में कहा गया है— “श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्” — अर्थात श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति ही दिव्य अनुभूति और कृपा का अधिकारी बनता है। वर्तमान समय में इस तपोस्थल पर परम श्रद्धेय महंत धर्मदास जी महाराज विराजमान हैं, जो पूज्य गुरुदेव के बताये मार्ग पर चलते हुए भक्तों को कल्याण का मार्ग दिखा रहे हैं महंत स्वामी धरमदास जी महाराज तेजस्वी, धैर्यवान और करुणामय व्यक्तित्व के धनी हैं। वे निरंतर निःस्वार्थ भाव से भक्तों की सेवा, मार्गदर्शन और आध्यात्मिक उत्थान में समर्पित रहते हैं। उनके सान्निध्य में आने मात्र से मन को अद्भुत शांति और आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो इस स्थल की प्रत्येक वायु, प्रत्येक वृक्ष और प्रत्येक कण में देवत्व का वास हो। यह रमणीक एवं अलौकिक स्थान केवल एक तपोभूमि ही नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत प्रतीक है। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है कि जहाँ संतों का वास होता है, वहाँ देवताओं का निवास स्वतः हो जाता है। यही कारण है कि इस सिद्ध तपोस्थल पर सदैव दिव्य चेतना और ईश्वरीय उपस्थिति का अनुभव होता है। यहाँ आने वाला प्रत्येक भक्त अपने भीतर एक नवीन ऊर्जा, आशा और आत्मबल का संचार अनुभव करता है। सचमुच, हरिद्वार की इस पावन भूमि पर स्थित यह सिद्ध स्थल श्रद्धा और भक्ति का अनुपम तीर्थ है। इस तपो स्थल पर कई देवी देवताओं के साथ-साथ महान संत महापुरुषों ने भी तपस्या की है इस स्थान पर जाने मात्र से एक अपार सुख की अनुभूति होती है आओ हम सब चलें देवी देवताओं की तपोस्थली संत महापुरुषों की इस पावन स्थली सिद्ध स्रोत

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