सतत जनजागरुकता मुहिम से लगातार बढ़ रहे अंग प्रत्यारोपण एम्स में 3 साल में हुए 22 किडनी दान व ट्रांसप्लांट
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April 18, 2026
कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड
एम्स,ऋषिकेश में अंगदान को लेकर लगातार मुहिम जारी है, इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए एम्स संस्थान द्वारा चलाए जा रहे सतत जनजागरुकता अभियान का ही नतीजा है कि लोगों में अंगदान के प्रति जागरुकता बढ़ी है। संस्थान के इन्हीं प्रयासों के मद्देनजर यहां अंगदान एवं प्रत्यारोपण प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब तक 22 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। जिसमें लोगों ने एम्स की संकल्पबद्ध मुहिम से प्रेरित होकर अपने प्रियजनों को नया जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी तरह से दो लोगों का मृत्यु के उपरांत विभिन्न अंगों का दान एवं प्रत्यारोपण किया गया है।
एम्स संस्थान में अंगदान एवं प्रत्यारोपण अभियान में अग्रणीय भूमिका निभाने वाले संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग की फैकल्टी डॉ. शैरोन कंडारी व यूरोलाजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर मित्तल के मुताबिक एम्स संस्थान की ओर से अंगदान एवं प्रत्यारोपण (ऑर्गन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांट) को लेकर वृहद स्तर पर सततरूप से जनजागरुकता अभियान चलाया जा रहा है, जिससे जरुरतमंदों को जीवनदान दिया जा सके। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में करीब तीन वर्षों से अंगदान के प्रति लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से समय समय पर जनजागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जारहा है, जिससे प्रेरित होकर लोग अंगदान को लेकर आगे आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि संस्थान में अप्रैल-2023 में किडनी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया शुरू की गई थी। जिसके बाद से एम्स, ऋषिकेश में वर्षवार लगातार किडनी डोनेशन व प्रत्यारोपण में इजाफा हुआ है। यह संस्थान द्वारा इस दिशा में सततरूप से जारी जनजागरुकता मुहिम का नतीजा है। जिसके अंतर्गत पहले वर्ष 2023 में क्रमश: अप्रैल व सितंबर माह में दो लोगों ने किडनी (गुर्दे) की बीमारी से ग्रसित अपने प्रियजनों को किडनी दान कर अवशेष जीवन को जीने में मदद की।
इसी तरह एम्स संस्थान में वर्ष 2024 में कुल 06 लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई, जो कि क्रमश: जनवरी में 01, मई में 02, सितंबर में 03 लोगों का गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया। इसी प्रकार वर्ष-2025 में फरवरी माह में 02, मार्च में 02, मई माह में 02, सितंबर में 02 और नवंबर में 02 तथा दिसंबर माह में 04 लोगों को सफलतापूर्वक गुर्दा प्रत्यारोपित किए गए। जिसमें गुर्दे की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के परिजन अपने प्रियजनों को किडनी दान कर मददगार साबित हुए।
(दो साल में हुए दो लोगों के केडवरिक ऑर्गन डोनेशन)
एम्स संस्थान में अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद से बीते तीन वर्षों में विभिन्न दुर्घटनाओं में गंभीर घायल दो लोगों के परिजनों द्वारा चिकित्सकों द्वारा संबंधित दुर्घटना ग्रसित व्यक्ति को ब्रेन डैड घोषित करने के उपरांत उनके परिजनों ने अपने प्रियजनों की केडवरिक ऑर्गन डोनेशन किए गए। इनमें संस्थागत स्तर पर पहला मल्टी ऑर्गन डोनेशन वर्ष 2024 में किया गया। जिसमें अगस्त -2024 में कांवड़ यात्रा पर आए 25 वर्षीय युवक सचिन सड़क दुर्घटना में गंभीररूप से घायल हो गए थे, एम्स में उपचार के दौरान उन्हें चिकित्सकीय टीम द्वारा ब्रेन डेड घोषित किया गया। जिसकी जानकारी टीम द्वारा उनके परिजनों को दी गई, इसके बाद उन्होंने अंगदान कराने का निर्णय लिया, जिसके तहत 1 किडनी व पेनक्रियाज पीजीआई चंडीगढ़, 1 किडनी व लीवर आईएलबीएस दिल्ली व 2 कॉर्निया एम्स ऋषिकेश को प्रत्यारोपण के लिए सौंपे गए।
इसी प्रकार 23 जनवरी-2026 को दुर्घटना में गंभीर घायल व्यक्ति रघु को एम्स में इलाज के दौरान चिकित्सकों के ब्रेन डेड घोषित करने के बाद परिजनों के निर्णय पर उनका केडवरिक ऑर्गन डोनेशन किया गया, जिसमें 1 किडनी दिल्ली एम्स, 1 किडनी व पेनक्रियाज व लीवर पीजीआई चंडीगढ़, हार्ट आरआर हॉस्पिटल दिल्ली व 2 कॉर्निया एम्स,ऋषिकेश को ट्रांसप्लांट के लिए सौंपे गए।
(ऋषिकेश आई बैंक, एम्स)
कुल कॉर्निया प्राप्त किए- 1246
कुल प्रत्यारोपित कॉर्निया -619
विभिन्न अस्पतालों में वितरित किए गए -308
एम्स, ऋषिकेश के आई बैंक को वर्षवार प्राप्त कॉर्निया
2019-100
2020-80
2021-144
2022-208
2023-238
2024-232
2025-192
2026-52
कुल योग -1246
प्रत्यारोपित कॉर्निया
2019-53
2020-36
2021-89
2022-144
2023-140
2024-87
2025-47
2026-23
कुल योग -619
वितरित कॉर्निया
2019-2
2020-23
2021-3
2022-39
2023-57
2024-98
2025-80
2026-6
कुल योग -308
(एम्स में देहदान व संकल्प के आंकड़े)
वर्ष 2012 -2026 -101
वर्ष 2025-26- 9 बॉडी डोनेट
संकल्पपत्र- वर्ष 2013-2026 तक 115
वर्ष 2025-26- 06 संकल्पपत्र भरे
ट्रांसपोर्ट इन्वॉल्विंग की शुरुआत-2018 से
2018 से 2026 तक 54 डेड बॉडी ट्रांसपोर्ट
03विदेशी नागरिकों के शव भेजे- लंदन, कनाडा व सिंगापुर
2025-26- सर्वाधिक 26 डेड बॉडी ट्रांसपोर्ट इन्वॉल्विंग
(अंगदान महान व जीवन रक्षक कार्यः निदेशक एम्स)
एम्स ऋषिकेश की निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉक्टर) मीनू सिंह ने बताया कि अंगदान (Organ Donation) एक महान और जीवनरक्षक कार्य है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति अपने अंगों को मृत्यु के बाद या कुछ परिस्थितियों में जीवित रहते हुए किसी अन्य व्यक्ति को दान कर सकता है। यह चिकित्सा विज्ञान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसने असंख्य लोगों को नया जीवन प्रदान किया है।
निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि मानव शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग जैसे गुर्दे, हृदय, यकृत, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत ऐसे होते हैं, जो गंभीर रूप से खराब होने पर व्यक्ति के जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplantation) ही जीवन बचाने का एकमात्र उपाय रह जाता है। अंगदान के माध्यम से एक व्यक्ति कई लोगों की जान बचा सकता है और उन्हें स्वस्थ जीवन जीने का अवसर दे सकता है।
एम्स निदेशक के मुताबिक अंगदान का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दुनिया भर में लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं। भारत में भी बड़ी संख्या में मरीज ऐसे हैं जिन्हें गुर्दा, यकृत या हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, लेकिन अंगदान की कमी के कारण उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पाता। इसलिए समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है।