Breaking News

कथा व्यास रमेश जी भाई ने कहा—भागवत कथा श्रवण से होता है जीव का कल्याण, हरिद्वार में गंगा तट पर कथा श्रवण का विशेष आध्यात्मिक महत्व

कमल अग्रवाल( हरिद्वार) उत्तराखंड

हरिद्वार : उत्तरी हरिद्वार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच भव्य एवं दिव्य रूप में हुआ। सप्ताहभर तक कथा व्यास श्री रमेश जी भाई ने व्यास पीठ से श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, धर्म, सदाचार और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराया। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

कथा व्यास श्री रमेश जी भाई ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाली दिव्य ज्ञानधारा है। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, प्रेम, करुणा और सद्भाव की भावना जागृत होती है। भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र और उनकी लीलाओं का श्रवण मनुष्य को मोह-माया से ऊपर उठकर सत्य, धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने सप्ताहभर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा, रास प्रसंग, कंस वध तथा भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया। इन प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने समझाया कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानवता को प्रेम, धर्म, नीति, कर्म और समर्पण का संदेश देता है। कथा के दौरान जब भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनकी भक्ति से जुड़े प्रसंगों का वर्णन हुआ तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

कथा व्यास ने कहा कि भागवत का मूल संदेश मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार, लोभ और मोह को त्यागकर परमात्मा की शरण में जाने की प्रेरणा देना है। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, यदि मनुष्य का विश्वास भगवान और धर्म में बना रहे तो वह कठिनाइयों का सामना धैर्य और सकारात्मकता के साथ कर सकता है।

हरिद्वार में भागवत कथा का विशेष महत्व

उन्होंने कहा कि हरिद्वार स्वयं सनातन धर्म, साधना और आध्यात्मिक चेतना की पावन भूमि है। यहां मां गंगा के पवित्र तट पर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभूति का अवसर बन जाता है। देशभर से संत, महात्मा और श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान, पूजन, ध्यान और कथा-श्रवण के माध्यम से अपने जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ते हैं।

मां गंगा को भारतीय सनातन परंपरा में मोक्षदायिनी और पवित्रता की प्रतीक माना गया है। गंगा के तट पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ, कथा और सत्संग श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक शांति और आत्मचिंतन की भावना उत्पन्न करते हैं। यही कारण है कि हरिद्वार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

कथा के विश्राम अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में सहभागिता की और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। आयोजकों की ओर से कथा के सफल आयोजन के लिए संतों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।

कथा के समापन पर उपस्थित भक्तों ने कहा कि सात दिनों तक भागवत कथा के माध्यम से उन्हें भगवान की लीलाओं के साथ-साथ जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा प्राप्त हुई।

Check Also

ऋषिकेश नगर निगम के नवनियुक्त मनोनीत पार्षदों ने ऋषिकेश विधायक डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल से शिष्टाचार भेंट की

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड ऋषिकेश : ऋषिकेश नगर निगम के नवनियुक्त मनोनीत पार्षदों ने ऋषिकेश विधायक …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *