कथावाचक आचार्य श्री अखिलेश चंद्र शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उसके संदेशों को आत्मसात करने का माध्यम है।
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September 22, 2026
कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड
हरिद्वार, कनखल / कनखल स्थित संन्यास रोड पर ग्वालियर से आए शिवहरे परिवार के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया जा रहा है। कथा के आयोजन से क्षेत्र का वातावरण आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा पंडाल में पहुंचकर श्रीमद्भागवत के दिव्य प्रसंगों का श्रवण कर रहे हैं।
कथा का आयोजन श्री निशांत शिवहरे एवं धर्मपत्नी श्रीमती मेघा शिवहरे के सानिध्य में किया जा रहा है। आयोजन में परिवार की बेटियां श्रीमती नेहा गोयल एवं श्रीमती बिन्नी गोयल, दामाद श्री प्रमोद गोयल एवं श्री पुनीत गोयल तथा सहयोगी श्री नीरज भट्ट सहित परिवार के सदस्य व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। कथा के व्यास पीठ पर चित्रकूट धाम से पधारे आचार्य श्री अखिलेश चंद्र शास्त्री महाराज विराजमान हैं, जिनके मुखारविंद से श्रद्धालु श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी प्रसंगों का श्रवण कर रहे हैं।
श्रीमद्भागवत कथा का विशेष महत्व : सनातन धर्म में श्रीमद्भागवत महापुराण को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अनुपम ग्रंथ माना गया है। भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव चरित्र, गजेंद्र मोक्ष, गोवर्धन लीला, रुक्मिणी विवाह तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े अनेक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य, प्रेम, सेवा और सदाचार का संदेश मिलता है।
कथावाचक आचार्य श्री अखिलेश चंद्र शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उसके संदेशों को आत्मसात करने का माध्यम है। भगवान की भक्ति मनुष्य को अहंकार, मोह और नकारात्मक विचारों से दूर कर सेवा, सद्भाव और परोपकार की ओर प्रेरित करती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा के प्रत्येक प्रसंग से जीवनोपयोगी सीख ग्रहण करने का आह्वान किया।
हरिद्वार में कथा श्रवण का बढ़ जाता है आध्यात्मिक महत्व : धर्मनगरी हरिद्वार को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है। मां गंगा के पावन तट पर स्थित हरिद्वार सदियों से साधु-संतों, ऋषि-मुनियों और श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां गंगा स्नान, पूजा-अर्चना, सत्संग और कथा-श्रवण की विशेष धार्मिक परंपरा रही है।
कनखल भी हरिद्वार की प्राचीन धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि कनखल की भूमि भगवान शिव और माता सती से जुड़े पौराणिक प्रसंगों के कारण विशेष धार्मिक महत्व रखती है। ऐसे पावन वातावरण में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का अवसर बन जाता है।
कथा आयोजन के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव से कथा श्रवण के साथ भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण कर रहे हैं। आयोजन स्थल पर भक्ति भजनों और धार्मिक वातावरण से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। शिवहरे परिवार की ओर से कथा में अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को शामिल होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया गया है।