कलश यात्रा के साथ हुआ कथा का शुभारंभ, पितृमोक्ष और गोसेवा के संकल्प के साथ आयोजित हो रही सात दिवसीय कथा
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September 24, 2026
कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड

हरिद्वार : तीर्थ नगरी हरिद्वार में श्री राम कृपा धाम आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य एवं दिव्य आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में किया जा रहा है। कथा का शुभारंभ विधिवत कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान श्रीहरि के जयकारों के साथ कथा आयोजन का शुभारंभ किया।
कथा आयोजन में श्रीमती सविता एवं श्री सतीश बवेजा, श्री करण बवेजा, श्री वरुण बवेजा सहित राठौरा खुर्द, हस्तिनापुर, मेरठ निवासी समस्त बवेजा परिवार श्रद्धापूर्वक उपस्थित रहा। कथा व्यास के रूप में साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी जी महाराज अपने मुखारविंद से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का रसपान करा रही हैं।
श्रीमद्भागवत कथा को सनातन परंपरा में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, उनके दिव्य चरित्र और भक्तों की आस्था के माध्यम से भागवत कथा मनुष्य को सत्य, धर्म, सदाचार, सेवा और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कथा श्रवण से मन में आध्यात्मिक चेतना का संचार होने के साथ ही जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।
पितृ पक्ष के दौरान आयोजित की जा रही इस कथा का विशेष धार्मिक महत्व भी है। आयोजकों के अनुसार कथा का उद्देश्य पितरों की शांति एवं मोक्ष की कामना के साथ-साथ गोसेवा को समर्पित सेवा कार्य को आगे बढ़ाना है। साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी जी ने कहा कि कथा में चढ़ावे के रूप में प्राप्त होने वाली समस्त धनराशि गोसेवा के लिए समर्पित की जाएगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा श्रवण के साथ सेवा और परोपकार के कार्यों में भी सहभागी बनने का आह्वान किया।
हरिद्वार को देवभूमि उत्तराखंड की प्रमुख आध्यात्मिक एवं तीर्थनगरी के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। मां गंगा का पावन तट, संत-महापुरुषों की तपस्थली और धार्मिक आयोजनों की समृद्ध परंपरा हरिद्वार को देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनाती है। ऐसे में हरिद्वार की पावन धरती पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का विशेष अवसर प्रदान कर रहा है।
कथा के दौरान श्रद्धालु प्रतिदिन साध्वी डॉ. विश्वेश्वरी देवी जी के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं एवं भागवत के आध्यात्मिक प्रसंगों का श्रवण कर रहे हैं। आश्रम परिसर में कथा के दौरान भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।