हरिद्वार : संत विनोबा भावे द्वारा स्थापित आचार्यकुल की केंद्रीय समिति की दो दिवसीय बैठक का जय जगत के उद्घोष के साथ हुआ शुभारंभ
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October 24, 2026
कमल अग्रवाल (हरिद्वार )उत्तराखंड
हरिद्वार : संत विनोबा भावे द्वारा स्थापित आचार्यकुल की केंद्रीय समिति की दो दिवसीय बैठक का जय जगत के उद्घोष के साथ शुभारंभ हुआ। बैठक में 19 राज्यों के संयोजक गण की विशेष उपस्थिति है। आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य धर्मेन्द्र की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में शुभारम्भ समारोह के मुख्य अतिथि- डॉ विनय कुमार पांडेय ने विनोबा जी ने देवनागरी लिपि को सुगम सरल बनाने की पहल की थी। भूदान आंदोलन उनकी पहचान बन गया है।
पर्यवेक्षक चंद्रशेखर ने कहा कि आचार्य विनोबा जी ने किसी भी वैचारिकी के प्रति बिना द्वेष के सभी संस्कृति को स्वीकार किया है। पर्यवेक्षक जी ने आचार्य विनोबा द्वारा दिये गए तीन मंत्रों निर्भयता, निर्वैरता, निष्पक्षता की व्याख्या प्रस्तुत की।
झारखंड के प्रांत अध्यक्ष प्रो जंग बहादुर पाण्डेय जी- जानकारी और समझदारी की व्याख्या प्रस्तुत की। दुनिया का 95 प्रतिशत जानकर है। बहेलिए और तोते की कथा सुनाई। 5 प्रतिशत समझदार है। यह दुनिया 5 प्रतिशत पर चल रही है। जीवन में उतारने के लिए पढ़ाया था न कि पाठ रटकर कंठस्थ करने के लिए। युधिष्ठिर ने कहा कि यदि क्रोध आ आए पाठ याद नहीं हुआ।
छत्तीसगढ़ की प्रान्त अध्यक्ष डॉ शीला शर्मा ने कहा कि आचार्यकुल सिर्फ एक संस्था नहीं बल्कि एक वैचारिक क्रांति है। छात्र सिर्फ पुस्तकीय ज्ञान तक न रह जाये। पढ़ाई परीक्षा में अधिक अंक प्राप्ति के लिए ही न हो।
प्रथम सत्र में उत्तर प्रदेश के संगठन प्रभारी, डॉ शिवनाथ सिंह शिव, इंद्रजीत तिवारी निर्भीक, डॉ रविन्द्र चंद्र, कमलेश्वर मिश्र, जम्मू काश्मीर से डॉ टीसी बर्मा, राजस्थान से डॉ सतीश चंद्र शांडिल्य, संभल से डॉ ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, डॉ रघुनंदन, पत्रकारिता प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रदीप सारंग, हरियाणा से मधू गोयल, उत्तर प्रदेश से अभय कुमार श्रीवास्तव, विनोद कुमार, डॉ नरेन्द्र राय, उत्तराखण्ड से सुरेश जी, पंजाब से फगवाड़िया जी, डॉ शिवेश्वर पाण्डेय प्रदेश संयोजक उत्तराखंड पत्रकारिता प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी ने विचार व्यक्त किया।
बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य धर्मेन्द्र को अगले दो वर्ष के पुनः लिए चुन लिया गया। यह भी तय हुआ कि दिसम्बर माह में जिला कुशीनगर में आचार्यकुल का राष्ट्रीय सम्मेलन होगा तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन काठमांडु में होगा। आचार्य धर्मेन्द्र ने आभार व्यक्त किया तथा अरविंद आनंद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
द्वितीय सत्र संत विनोबा की वैचारिकी को समर्पित रहा। तृतीय सत्र कविताओं के नाम रहा। कविवर डॉ शिवनाथ शिव, डॉ त्रिलोक चंद, वन्दना सूर्यवंशी की गरिमामयी उपस्थिति में कवयित्री मधु गोयल, श्रीपाल शर्मा ईदरीशपुरी, रमेश चन्द्र द्विवेदी, डॉ सतीश शांडिल्य, ईश्वरचंद विद्यावाचस्पति, डॉ राजेन्द्र तिवारी, अभय कुमार श्रीवास्तव, संगीता अहलावत के अतिरिक्त एक दर्जन रचनाकारों ने अपनी कविताओं से कवि सम्मेलन को ऊँचाइयाँ प्रदान की।