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परमार्थ निकेतन में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य संतों का दिव्य संगम

कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड

ऋषिकेश, परमार्थ निकेतन में श्री स्वामी नारायण गुरूकुल से पूज्य संत, गुरूकुल के विद्यार्थी और सैकड़ों की संख्या में साधक आये। परमार्थ निकेतन में सत्संग साधना शिविर श्री स्वामिनारायण गुरूकुल विश्वविद्यालय, अहमदाबाद द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें पूज्य माधवप्रिय स्वामी जी महाराज, पूज्य बाल स्वामी जी महाराज, श्री भक्तवल्सल स्वामी जी, श्री राम स्वामी जी और अनेक पूज्य संतों का आगमन हुआ। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने सभी का अभिनन्दन किया।

परमार्थ निकेतन के दिव्य वातावरण में पूज्य संतों के पावन सान्निध्य में साधकगण दिव्य साधनाओं का अनुभव कर रहे हैं। यहां का पूरा वातावरण साधना, भक्ति से परिपूर्ण हैं। साधक प्रातःकाल गंगा स्नान और यज्ञ के साथ गंगा जी के पावन तट पर स्नान कर अपने जीवन में दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं।

पूज्य संतों ने साधना की महिमा, जीवन में तपस्या और योग के महत्व को सरल और प्रभावशाली शब्दों बताया। साधना केवल शरीर और मन की अनुशासनात्मक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आत्मा की दिव्यता और परमात्मा के साथ जीवंत संवाद का माध्यम है।

आज के युग में जब युवाओं का जीवन तनाव, मानसिक अशांति और भौतिकता के प्रभाव में उलझ रहा है, तब साधना का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। साधना मन को अशांति से मुक्त कर, आत्मा के आनंद और स्थिरता की ओर ले जाती है। इसके माध्यम से सत्कर्म, संयम, धैर्य और सहनशीलता का विकास होता है। साधना से ही जीवन में संतुलन, विवेक और उच्चतम आध्यात्मिक मूल्य प्राप्त होते हैं।

परमार्थ निकेतन व श्री स्वामिनारायण गुरूकुल विश्वविद्यालय, अहमदाबाद ने मिलकर स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत से ही अहमदाबाद से बहुत बड़े स्तर पर अद्भुत कार्य किये। कई धर्मों के धर्मगुरूओं को आमंत्रित कर साबरमती के पावन तट पर गंगा आरती की। चाहे गंगा आरती की बात हो या स्वच्छता अभियान की बात हो, समाज सेवा की बात हो या सेवा का कोई भी कार्य हो दोनों संस्थाओं ने मिलकर अनेक अद्भुत आयोजन किये।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि उत्तराखंड़, चारों धामों की धरती है। यह केवल ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से ही महान नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक दृष्टि से भी सर्वोच्च भूमि है। यहाँ के तीर्थ व यात्रायें आत्मा के आरोहण के केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठित हैं। तीर्थ केवल पूजा या दर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि मन, बुद्धि और हृदय को शुद्ध करने का अनुभव हैं। प्रत्येक तीर्थ, चाहे वह गंगा के तट पर स्थित हो या हिमालय की ऊँचाइयों में, हमें अपने भीतर के दिव्य अनुभव से जोड़ता है और जीवन के उच्चतर उद्देश्य की ओर ले जाता है।

तीर्थ यात्रा पर जाना और गंगा तट पर आने का उद्देश्य केवल बाहरी यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा है। यह यात्रा हमें हमारी अंतरात्मा से मिलने का अवसर देती है। गंगाजी की निर्मल धारा हमारे शरीर और मन को शुद्ध करती है और साधना हमारे चेतन मन को शुद्ध करती है।

पूज्य माधवप्रिय स्वामी जी महाराज ने कहा कि परमार्थ निकेतन, सनातन संस्कृति, योग और साधना का पावन केंद्र है। साधना, योग, यज्ञ और सत्संग का यह संगम आज के आधुनिक युग में प्रत्येक साधक के लिए अनमोल अवसर है। यह जीवन को स्थिरता, शांति और दिव्यता की ओर अग्रसर करता है जिससे आध्यात्मिक जागरण का मार्ग प्रशस्त होता हैं। आप सब के जीवन में ये साधना के जो सात दिन है इसका पूरा पूरा लाभ ले और इस स्वर्गमय वातावरण में व्याप्त दिव्य ऊर्जा को आत्मसात करें।

परमार्थ निकेतन के पवित्र वातावरण में आकर साधकों को स्वर्ग की अनुभूति हो रही हैं। वास्तव में स्वर्गाश्रम, स्वर्ग के समान है यहां की स्वच्छता बनाये रखना हम सभी का परम कर्तव्य है।

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