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ऋषि सनातन संघ की हुंकार: पूज्यश्री रतन वशिष्ठ जी महाराज का राष्ट्र के नाम संदेश

कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड

ऋषि सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्यश्री रतन वशिष्ठ जी महाराज ने वर्तमान सत्ता को कड़े और स्पष्ट शब्दों में सचेत करते हुए कहा है कि ब्राह्मण समाज, विप्र समाज और सवर्ण समाज का अपमान करना साक्षात् काल को निमंत्रण देना है। महाराज जी ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने अपनी अदूरदर्शी नीतियों और भेदभावपूर्ण व्यवहार से उस सनातनी एकता को छिन्न-भिन्न कर दिया है, जिसे बनाने में दशकों का संघर्ष लगा था। सत्ता के मद में चूर होकर आपने सनातन की उस अटूट कड़ी को तोड़ दिया है जिसने हिंदू समाज को जोड़ रखा था। ब्राह्मण और सवर्ण समाज, जो राष्ट्र का मस्तिष्क और रीढ़ है, आज खुद को ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रहा है। यदि समाज का सबसे प्रबुद्ध और रक्षक वर्ग ही उपेक्षित होगा, तो राष्ट्र की सुरक्षा और संस्कृति का ढांचा ढहना निश्चित है।

महाराज जी ने कठोर चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने जातियों के बीच भेदभाव की जो खाई पैदा की है, उसका परिणाम अत्यंत भयावह होगा। जब घर के लोग ही आपस में लड़ेंगे और सनातनी एकता खंडित होगी, तो इसका सीधा लाभ विधर्मी उठाएंगे। इतिहास गवाह है कि जब-जब हमारे भीतर फूट पड़ी है, तब-तब विदेशी आक्रांताओं और विधर्मियों ने भारत पर कब्जा किया है। वर्तमान सरकार अपनी वोट बैंक की राजनीति के चक्कर में वही पुरानी गलती दोहरा रही है, जो राष्ट्र को गुलामी की ओर ले जा सकती है। यदि ब्राह्मण और सवर्ण समाज को इसी तरह हाशिए पर धकेला गया, तो आपसी संघर्ष का लाभ उठाकर विधर्मी शक्तियां भारत की सत्ता और संस्कृति पर फिर से हावी हो जाएंगी।

अतः सरकार को यह अंतिम चेतावनी है कि वह प्रतिशोध और विभाजन की राजनीति को तुरंत त्यागे। ब्राह्मण समाज का सम्मान केवल एक वर्ग का सम्मान नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प है। यदि सरकार ने अपनी दिशा नहीं बदली और सनातनी एकता को और अधिक क्षति पहुँचाई, तो ऋषि सनातन संघ के नेतृत्व में वह विद्रोह होगा जिसे संभालना किसी भी सरकारी तंत्र के वश में नहीं होगा। याद रखिए, जब अपनों के बीच नफरत की दीवारें खड़ी की जाती हैं, तो बाहर के दुश्मन को रास्ता खुद-ब-खुद मिल जाता है। संभल जाइए, वरना इतिहास आपको सनातन एकता तोड़ने और विधर्मियों का मार्ग प्रशस्त करने वाले अपराधी के रूप में याद करेगा। अब समझौता नहीं, सीधे सुधार और सम्मान की आवश्यकता है, अन्यथा परिणाम विनाशकारी होंगे।

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