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परमार्थ निकेतन में योगजिज्ञासुओं का अद्भुत संगम

कमल अग्रवाल( हरिद्वार )उत्तराखंड

ऋषिकेश/ परमार्थ निकेतन की पावन भूमि एक बार फिर विश्व को योग, ध्यान और आध्यात्मिकता की अमूल्य धरोहर से जोड़ने के लिये तैयार है। हिमालय की गोद में बसे इस दिव्य आश्रम में एक बार फिर योग साधना, ध्यान की गहराई और मंत्रों की पवित्र ध्वनि गूंज रही है। परमार्थ निकेतन का सम्पूर्ण वातावरण एक अद्भुत दिव्यता से युक्त है।

इस वर्ष आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारम्भ 9 मार्च को हो रहा है। अब तक विश्व के 40 से अधिक देशों से आये योगप्रेमी, साधक और आध्यात्मिक जिज्ञासु आ गये हैं।

आज गंगा जी की आरती में आध्यात्मिक गुरु परमहंस योगानंद जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये परमार्थ निकेतन में वैश्विक योग चेतना को आगे बढ़ाते हुये इस महोत्सव के पंजीकरण का शुभारम्भ किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि स्वामी परमहंस योगानंद जी ने योग, ध्यान और आत्मसाक्षात्कार के दिव्य संदेश के माध्यम से न केवल भारत की सनातन आध्यात्मिक परम्परा को विश्व तक पहुँचाया, बल्कि पूर्व और पश्चिम को आध्यात्मिक चेतना के एक सूत्र में जोड़ने का अद्भुत कार्य किया।

स्वामी परमहंस योगानंद जी ने संदेश दिया कि सच्चा सुख और शांति बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि अपने भीतर विद्यमान है। उनकी शिक्षाओं ने अनेकों साधकों को ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित किया।

यह महोत्सव योग के आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, स्वस्थ और जागरूक बनाने की एक समग्र यात्रा है। यहाँ योग के माध्यम से शरीर को स्वस्थ, ध्यान के माध्यम से मन को शांत और आध्यात्मिकता के माध्यम से आत्मा को जागृत करने का संदेश दिया जाता है।

परमार्थ निकेतन की यह धरती केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि एक जीवंत विश्वविद्यालय है जहाँ जीवन को जीने की कला सिखाई जाती है। यहाँ आने वाले प्रत्येक साधक केवल योग ही नहीं सीखते बल्कि अपने भीतर छिपी दिव्यता को पहचानने की प्रेरणा लेकर जाते हंै।

इस महोत्सव के दौरान विश्वभर से आये योगगुरु, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और विद्वान योग, आयुर्वेद, ध्यान, वेदांत और भारतीय संस्कृति की गहराइयों पर अपने अनुभव साझा करते हैं। विविध सत्रों, कार्यशालाओं और ध्यान साधनाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिलता है कि योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन की एक समग्र पद्धति है। जब अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और परम्पराओं से आये लोग एक ही उद्देश्य के साथ आत्मिक शांति और वैश्विक सद्भाव के लिए एकत्र होते हैं, तब यह योग महेात्सव वास्तव में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को जीवंत कर देता है।

विश्व के अनेक देशों से आये प्रतिभागी इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की प्राचीन योग परम्परा सम्पूर्ण मानवता के लिए एक अनमोल उपहार है।

इस महोत्सव का प्रत्येक क्षण यह संदेश दे रहा है कि यदि मानवता को एकजुट करना है, यदि पृथ्वी पर शांति स्थापित करनी है, तो योग और ध्यान का मार्ग ही सबसे सरल और प्रभावी मार्ग है।

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