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विश्वविख्यात भारत माता मंदिर के संस्थापक ब्रह्मलीन जगद्गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज का सप्तम समाधि दिवस श्रद्धापूर्वक संपन्न

कमल अग्रवाल ( हरिद्वार)उत्तराखंड

हरिद्वार। सनातन जगत के परम-आदर्श, आदि शंकराचार्य की अद्वैत वेदान्त परम्परा के दिव्य आलोक-स्तम्भ और विश्वविख्यात भारत माता मन्दिर के संस्थापक, करुणामूर्ति निवृत्त जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज का सप्तम समाधि दिवस (पुण्यतिथि) आज ‘भारत माता मंदिर समन्वय सेवा ट्रस्ट’ एवं ‘भारत माता जनहित ट्रस्ट’ के तत्वावधान में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। यह संपूर्ण पावन कार्यक्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष, जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज की गरिमामयी अध्यक्षता एवं सान्निध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े उनके कोटि-कोटि श्रद्धालुओं ने गुरुदेव की चिन्मय आत्मसत्ता को भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए।

गुरु शाश्वत चेतना हैं, उनका आदर्श ही हमारा मार्गदर्शक: स्वामी अवधेशानंद गिरि* इस अवसर पर उपस्थित संतों, न्यासियों एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य जूनापीठाधीश्वर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने अपने भावपूर्ण वक्तव्य में कहा — “पूज्यपाद गुरुदेव का सम्पूर्ण जीवन भारतीय अध्यात्म की गौरवशाली परम्परा का एक अद्वितीय स्वर्णिम अध्याय है। वे सनातन संस्कृति की सार्वभौम चेतना के सजीव प्रतिनिधि थे, जिनके भीतर भगवान आदि शंकराचार्य की अद्वैत दृष्टि, वेदों का प्रकाश और भारत की सांस्कृतिक आत्मा एकाकार होकर प्रकट हुई थी। गुरुदेव भगवान का ब्रह्मलीन होना केवल स्थूल देह का अवसान है; गुरु कभी विलुप्त नहीं होते, वे तो शाश्वत चेतना हैं जो अपने उपदेश, तप और अनुग्रह से युगों-युगों तक साधकों का मार्ग आलोकित करते हैं। उनकी सच्ची उपासना केवल पुष्पांजलि में नहीं, बल्कि उनके द्वारा प्रदर्शित सत्य, सेवा, साधना, समन्वय और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने में है।”

“गुरुः न शरीरमात्रः, गुरुः तु नित्यं ब्रह्मस्वरूपः। यस्य कृपया आत्मप्रकाशः भवति, स एव सद्गुरुः।” समाधि मंदिर पर विशेष अभिषेक एवं रजत छत्र अर्पण* समाधि दिवस के अवसर पर आज प्रातःकाल से ही समाधि मंदिर परिसर, राघव कुटीर हरिपुर कलां में गहरा आध्यात्मिक वातावरण रहा। यहाँ मुख्य विग्रह का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन-अर्चन, रुद्राभिषेक और महाआरती संपन्न हुई। पूज्य गुरुदेव के प्रति अगाध श्रद्धा निवेदित करते हुए आगर-मालवा (मध्य प्रदेश) से पधारे श्रद्धालु श्री दिलीप सोनी जी एवं श्रीमती अर्चना जी द्वारा समाधि पीठ पर एक भव्य और कलात्मक चाँदी का छत्र (रजत छत्र) अर्पित किया गया।

ट्रस्ट बोर्ड की बैठक में सेवा प्रकल्पों को बढ़ाने का संकल्प* इस पावन अवसर पर भारत माता जनहित ट्रस्ट के बोर्ड की एक विशेष बैठक भी संपन्न हुई, जिसमें पूज्य स्वामी जी महाराज के राष्ट्रसेवा और लोकमंगल के प्रकल्पों को और अधिक सुदृढ़ता से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। साथ ही, पूज्य गुरुदेव के श्रीसमाधि-मन्दिर की सेवा, संरक्षण, सौन्दर्य-विस्तार तथा भावी विकास-परियोजनाओं के सम्बन्ध में गंभीर विचार-विमर्श भी सम्पन्न हुआ। बैठक में मुख्य रूप से ट्रस्ट के महासचिव श्री आई.डी. शास्त्री जी तथा सम्मानित न्यासीगण श्री भूपेन्द्र कौशिक जी, श्री अजय सूद जी, श्री सुरेश मोढ़ जी एवं श्री विजेंद्र वाजपेई जी उपस्थित रहे।

संतों एवं साधकों की गरिमामयी उपस्थिति*इस पावन अनुष्ठान के अवसर पर पूज्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरि जी महाराज, पूज्य महामण्डलेश्वर श्री स्वामी ललितानन्द गिरि जी महाराज, रश्मिता चतुर्वेदी, नवीन शर्मा सहित विशाल संत मंडली एवं साधक समूह की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने पूज्य गुरुदेव के चरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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