श्री परमधाम आश्रम में श्रीराम कथा का हुआ भव्य समापन
www.shrimannews.in
July 27, 2026
कमल अग्रवाल (हरिद्वार )उत्तराखंड
हरिद्वार : कनखल संदेश नगर स्थित श्री परमधाम आश्रम में गुरु भगवान की असीम कृपा से आयोजित दिव्य एवं भव्य श्रीराम कथा का श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ समापन हुआ।
इस पावन अवसर पर विशाल संत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से पधारे संत-महात्माओं एवं हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रभु श्रीराम के आदर्शों और संतों के अमृतमय उपदेशों का लाभ प्राप्त किया। संपूर्ण आश्रम परिसर जय श्रीराम एवं हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि ज्ञान, वैराग्य और भक्ति मानव जीवन की तीन ऐसी दिव्य शक्तियां हैं, जिनके समन्वय से जीवन सफल और सार्थक बनता है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र सत्य, मर्यादा, त्याग और धर्म की सर्वोच्च प्रेरणा है। जो व्यक्ति रामकथा का श्रवण श्रद्धा और विश्वास के साथ करता है, उसके अंतःकरण के विकार दूर होकर जीवन में शांति, सदाचार और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव जागृत होता है।
उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य मनुष्य के जीवन को दिशा देने वाला दिव्य प्रकाश है।महामंडलेश्वर आचार्य ललितानंद महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि रामकथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का दिव्य माध्यम है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में वर्णित भगवान श्रीराम का जीवन हमें धर्म, करुणा, सेवा, क्षमा और कर्तव्यपालन की शिक्षा देता है। जब मनुष्य अपने जीवन में राम के आदर्शों को अपनाता है, तभी वास्तविक सुख और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में सत्संग, स्वाध्याय, सेवा और भगवान के नाम-स्मरण को स्थान दें, क्योंकि यही कलियुग में मोक्ष का सरल मार्ग है।परम पूज्य महामंडलेश्वर निर्भयानंद पुरी महाराज ने अपने पावन विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संसार की समस्त अशांति का समाधान केवल ईश्वर की भक्ति और गुरु कृपा में निहित है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जितना अधिक प्रभु के चरणों में समर्पित होता है, उतना ही उसका जीवन भय, मोह और अहंकार से मुक्त होता जाता है। गुरु का सान्निध्य मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर आत्मज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है।
उन्होंने कहा कि संत समाज सदैव मानवता, सद्भाव, प्रेम और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित रहा है तथा समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है।संत समागम के दौरान संत-महात्माओं ने श्रीराम नाम संकीर्तन, सत्संग एवं धर्मोपदेश के माध्यम से श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के संरक्षण, नैतिक जीवन, सेवा, परोपकार और राष्ट्रहित के लिए प्रेरित किया।
कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की आरती कर विश्व शांति, राष्ट्र की समृद्धि तथा समस्त मानवता के कल्याण की मंगलकामना की। अंत में संतों का पूजन-अभिनंदन एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। आईएस अवसर पर स्वामी नित्यनंद पुरी जी महाराज श्री भागवत पांडे ने भी अपने विचार व्यक्त किये