पूज्य साध्वी समाहिता दीदी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला केवल बाल स्वरूप की चंचलता नहीं, बल्कि भक्तों के निर्मल प्रेम और समर्पण को स्वीकार करने का देती दिव्य संदेश
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September 30, 2026
कमल अग्रवाल (हरिद्वार )उत्तराखंड
हरिद्वार : अग्रवाल भवन में जय मां बनभौरी देवी एवं महाराजा अग्रसेन परिवार, चंडीगढ़ की ओर से 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी, गोचरण, गोवर्धन धारण तथा छप्पन भोग के मनोहारी प्रसंगों का भक्तिभाव से श्रवण किया। कथा व्यास श्रीधाम वृंदावन से पधारीं पूज्य साध्वी समाहिता दीदी ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की दिव्यता और उनके आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से प्रस्तुत किया।
कथा के दौरान माखन चोरी लीला का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। साध्वी समाहिता दीदी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी की लीला केवल बाल स्वरूप की चंचलता नहीं, बल्कि भक्तों के निर्मल प्रेम और समर्पण को स्वीकार करने का दिव्य संदेश देती है। भगवान प्रेम और भक्ति से अर्पित भाव को स्वीकार करते हैं। गोपियों के साथ श्रीकृष्ण की मधुर लीलाओं ने कथा पंडाल में भक्तिमय वातावरण बना दिया।
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के गोप-ग्वालों के साथ गोचरण लीला का वर्णन किया गया। साध्वी समाहिता दीदी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से सरलता, प्रेम, करुणा और प्रकृति के प्रति संवेदना का संदेश दिया। श्रीकृष्ण का ग्वाल-बालों और गौमाता के साथ जुड़ाव भारतीय संस्कृति में गौसेवा एवं प्रकृति संरक्षण के महत्व को भी दर्शाता है।
कथा में गोवर्धन लीला का प्रसंग आते ही श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। साध्वी समाहिता दीदी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की और उन्हें भयमुक्त किया। गोवर्धन पूजा के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रकृति, पर्वत, गौवंश और पर्यावरण के प्रति सम्मान की भावना रखने का संदेश दिया। इसी प्रसंग के अंतर्गत भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए, जिसके दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य माना।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से अग्रवाल भवन का वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा श्रवण के लिए हिसार, चंडीगढ़, दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। बड़ी संख्या में भक्तजन प्रतिदिन कथा का रसपान कर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।
आयोजकों ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन 2 अक्टूबर को होगा। कथा के प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं के लिए भगवान की विभिन्न लीलाओं एवं श्रीमद्भागवत के महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जा रहा है।