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श्रीमद् भागवत महापुराण के समापन पर हुआ विशाल यज्ञ और भंडारे का आयोजन,भागवत के माध्यम से जीवन को मिलती है नई दिशा : श्री नवरत्न दवे

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड

हरिद्वार; दशनाम आश्रम भूपत वाला में श्री लटियाल माता सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह का आज विश्राम बड़े ही भक्ति भाव के साथ हुआ।

कृष्ण सुदामा का प्रसंग बहुत ही भाव और भक्ति से परिपूर्ण था जिसमें भक्तों के दिल को छुआ और उनकी भावनाओं को छुआ कथा व्यास पीठ पर आसीन जोधपुर राजस्थान से पधारी पूज्य संत तारा देवी जी ने अपने मुखारविंद से सभी भक्तजनों को श्रीमद् भागवत कथा का मधुर रसपान ज्ञान सप्ताह में भागवत के अनेक प्रसंग सुना कर कराया।

मुख्य यजमान एवं श्रद्धालु श्री नवरत्न दवे ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग बहुत ही ज्ञानपूर्वक भाव से परिपूर्ण और सांसारिक गतिविधियों को दिखाने और समझाने वाला है एवं भागवत कथा में सभी रिश्तो का महत्व देखने को मिलता है। श्रद्धालु पूर्णा बोहरा जी ने श्रीमद् भागवत कथा को बहुत ही भाव विभोर और आध्यात्मिक ज्ञान को समझाने वाली बताया उन्होंने कहा श्रीमद् भागवत कथा में श्री कृष्ण जन्म से लेकर प्रत्येक प्रसंग अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण महत्व रखता है क्योंकि प्रत्येक प्रसंग शिक्षा देने वाला है प्रेम ,दोस्ती, त्याग ,समर्पण इन्हीं सब भावनाओं से ओतप्रोत श्रीमद् भागवत कथा है।

कथा के दौरान भजन और संकीर्तन का भी वातावरण रहा पूरे आश्रम का वातावरण आध्यात्मिक और श्रद्धालुओं के जयकारे से गूंजता रहा ।श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन में हनुमान चालीसा, गणेश स्तुति और अनेक भजनों का भी आयोजन किया गया।

राजस्थान फलोदी से अनेक भक्तजन इस आध्यात्मिक आयोजन में हरिद्वार के पावन धरती पर मां गंगा के तट पर इस कथा को सुनने पधारे जिसमें पूर्णा बोहरा जी, अशोक बोहरा जी  फलोदी के पूर्व पार्षद लगातार तीन बार रहे हैं इस कथा का श्रवण भी उन्होंने बहुत ही भक्ति भाव से किया एवं श्री इंद्र लाल माथुर और इन्दू माथुर और अनेक भक्तजन राजस्थान से इस कथा में आए और इस ज्ञान सप्ताह उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा का सातों दिन बहुत ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ श्रवण किया।

श्रीमद् भागवत कथा में व्यास पूजन ,कृष्ण जन्म ,कृष्ण जी की बाल लीलाएं ,गोवर्धन लीला ,कृष्ण रुक्मण विवाह, कृष्ण सुदामा प्रसंग और श्रीमद् भागवत कथा के अनेक प्रसंग को सुना और अपने जीवन में उन्हें उतारने का प्रयास भी किया क्योंकि श्रीमद् भागवत कथा जीवन के हर पहलू हर रिश्ते से जुड़ी है और उसी से संबंधित ज्ञान भी कराती है।

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