श्री अवधूत जगत राम उदासीन आश्रम, कनखल में उदासीनाचार्य श्री चंद्र भगवान जी का 532वां प्राकट्य दिवस श्रद्धा के साथ हुआ आयोजित
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September 21, 2026
कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड
हरिद्वार/कनखल। श्री अवधूत जगत राम उदासीन आश्रम, कनखल में उदासीनाचार्य श्री चंद्र भगवान जी का 532वां प्राकट्य दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर आश्रम परिसर में विशाल संत सम्मेलन एवं भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाराज श्री सूतीक्षण मुनि जी महाराज के सानिध्य में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महापुरुषों, श्रद्धालुओं एवं भक्तजनों ने सहभागिता की।
प्राकट्य दिवस के अवसर पर आश्रम में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, संत समागम और भंडारे का आयोजन किया गया। संत-महापुरुषों ने उदासीन परंपरा की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतों की संगति और उनके बताए मार्ग पर चलना मानव जीवन को संस्कार, सेवा, सद्भाव और अध्यात्म से जोड़ता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा, परोपकार और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।
कौन थे उदासीनाचार्य श्री चंद्र भगवान जी : उदासीन परंपरा में उदासीनाचार्य श्री चंद्र भगवान जी का विशेष आध्यात्मिक स्थान माना जाता है। संत परंपरा के अनुसार उनका जीवन वैराग्य, तप, साधना, भक्ति और लोककल्याण के आदर्शों से जुड़ा रहा। उदासीन संप्रदाय में उन्हें ज्ञान, साधना और त्याग की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले महान आध्यात्मिक आचार्य के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। उनके प्राकट्य दिवस पर संत समाज द्वारा विशेष पूजा-अर्चना, सत्संग, संत सम्मेलन और भंडारे जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित संत-महापुरुषों एवं भक्तों ने श्री चंद्र भगवान जी के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए उनके बताए आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। संतों के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
इस अवसर पर श्री विष्णु दास जी महाराज, श्री रघुवर दास जी महाराज, श्री करौली शंकर महादेव जी महाराज, डॉ. उमेश सचान जी तथा कोठारी श्री नितिन मानाजी सहित अनेक संत-महापुरुष एवं गणमान्यजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
विशाल भंडारे में संतों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
श्रद्धालुओं ने संत-महापुरुषों से आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन में धर्म, सेवा और सदाचार को अपनाने का संकल्प लिया। आयोजकों ने सभी संतों और भक्तजनों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।