मेधा की पराकाष्ठा: १० वर्षीया वसुधा ने ‘अष्टाध्यायी’ के द्रुत अनुलोम-विलोम पाठ से ‘इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में रचा इतिहास
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September 26, 2026
कमल अग्रवाल (हरिद्वार)उत्तराखंड

ऋषिकेश : भारतीय संस्कृत एवं योग की नगरी ऋषिकेश की से पुनः एक बार वैदुष्य का अलौकिक प्रकाश प्रस्फुटित हुआ है। श्रीमती सुभद्रा देवी एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान संकाय के वेदविभाग के सहायकाचार्य डॉ. नारायण प्रसाद भट्टराई की ज्येष्ठपुत्री सुश्री वसुधा भट्टराई ने महर्षि पाणिनि प्रणीत ‘अष्टाध्यायी’ के जटिल सूत्रों का तीव्रतम गति से अनुलोम (सीधा) एवं विलोम (उल्टा) क्रम में एक साथ अविरल पाठ कर ‘इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित कराया है। वसुधा ने इस रिकार्ड को मात्र 3 मिनट 6 सेकंड पूरा कर अपने साथ-२ अपने विद्यालय के नाम को भी गौरवान्वित किया । इंडिया बुक रिकॉर्ड के द्वारा इसकी आधिकारिक 12 अगस्त २०२६ घोषणा की गई । जिसका प्रमाण पत्र 24 सितंबर 2026 को प्राप्त हुआ।
*मात्र १० वर्ष की कनिष्ठ वय में अभूतपूर्व उपलब्धि*
मात्र १० वर्ष २२ दिन की अल्पायु में वसुधा द्वारा अर्जित यह अलौकिक उपलब्धि महर्षि पाणिनि की व्याकरण-परम्परा तथा उनकी स्वयं की विलक्षण मेधा एवं एकाग्रता का अप्रतिम उदाहरण है। संस्कृत व्याकरण के दुरूह सूत्रों का स्मरण रखना ही अपने आप में अत्यन्त दुष्कर कार्य माना जाता है। ऐसे में ‘अष्टाध्यायी’ के प्रथम पाद के समस्त ७५ सूत्रों को एक ही प्रयास में अनुलोम एवं प्रतिलोम, दोनों क्रमों में सुना देना उनकी अद्भुत प्रतिभा और उच्च मानसिक एकाग्रता का परिचायक है। ऋषिकेश में जन्मी पली और अपने पिता के साथ काशी में अध्ययन कर रही वसुधा में अपने नाम कई रिकॉर्ड दर्ज किए हैं।
प्राचीन ‘शलाका परीक्षा’ में भी लहरा चुकी हैं श्रेष्ठता का परचम* वसुधा की माने तो सूत्रों को उल्टे (प्रतिलोम) क्रम में प्रस्तुत करने हेतु केवल कण्ठस्थीकरण पर्याप्त नहीं होता, अपितु इसके लिए मस्तिष्क में सम्पूर्ण ग्रन्थ की अचूक मानसिक रूपरेखा तथा अद्वितीय ध्यान-साधना अपरिहार्य है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में काशी के लोलार्क कुण्ड स्थित शारदा भवन में गणेशोत्सव के अवसर पर आयोजित होने वाली प्राचीन ‘शलाका परीक्षा’ में भी वसुधा पूर्व में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी हैं।
इस परीक्षा में ग्रन्थ के किसी भी पृष्ठ पर शलाका (सलाई) रखकर तत्क्षण वहीं से सूत्रार्थ सहित पूछे जाते हैं।
अविच्छिन्न साधना का स्वर्णिम परिणाम। वसुधा की यह स्वर्णिम सफलता कोई आकस्मिक घटना नहीं, अपितु उनकी अविच्छिन्न साधना एवं कठोर परिश्रम का प्रतिफल है। जून २०२६ में उन्होंने ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ इण्डिया’ में अपना नाम दर्ज करा चुकी वसुधा तुलसी विद्यानिकेतन, वाराणसी की कक्षा 4 की छात्रा हैं।
हाल ही में वसुधा ने १२ अगस्त २०२६ को ‘इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में पाणिनी अष्टाध्यायी के सूत्रों पर यह ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की।
काशी जैसी सर्वविद्या की परंपरा को इतनी अल्प वय में नवीन उत्कर्ष प्रदान करना माँ भारती, समस्त संस्कृत-अनुरागियों तथा सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए असीम गौरव एवं हर्ष का विषय है।
इस उपलब्धि के लिए तुलसी विद्या निकेतन सोसायटी परिवार के अध्यक्ष प्रो विश्वम्भरनाथ तथा विद्यालय के प्राचार्य तथा अन्य शिक्षकों ने वसुधा को बहुत-बहुत शुभकामनाएं और बधाईया दी।