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परमार्थ निकेतन में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारम्भ

कमल अग्रवाल (हरिद्वार )उत्तराखंड

ऋषिकेश * परमार्थ निकेतन के दिव्य प्रांगण में आज से श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। इस पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। स्वामीजी के प्रेरक संदेशों ने उपस्थित श्रद्धालओंु के हृदय को अध्यात्म के प्रकाश से आलोकित कर दिया।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि कार्तिक माह धर्म और अध्यात्म, ध्यान और योग, जप व पूजन का सबसे पावन समय है। इस माह में श्रीमद् भागवत कथा का मां गंगा के पावन तट पर श्रवण विशेष फलदायक है। कथा से मन शुद्ध, हृदय निर्मल और विचार सकारात्मक बनते हैं। जीवन के संघर्षों और कठिनाइयों के बीच कथा हमें धैर्य, भक्ति, करुणा और संयम का संदेश देती है।

स्वामी जी ने कहा कि गंगाजी में स्नान से शारीरिक शुद्धि, कथा ज्ञान गंगा में गोते लगाने से आध्यात्मिक शुद्धि और गंगा जी के पावन तट पर बैठने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। कार्तिक माह हमें आध्यात्मिक विकास के साथ अध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करता है। आप सभी मां गंगा में स्नान, गंगा जी की आरती व दीपदान कर इस पवित्र माह की दिव्यता को आत्मसात करें।

कथा का पावन प्रवाह कथाव्यास मÛ म Û कनकेश्वरी देवी जी के श्रीमुख से प्रवाहित हो रहा है। देवी जी अपनी मधुर वाणी से कथा को जीवंत कर रही है। उनके श्रीमुख से निकली वाणी में अध्यात्म की गहराई, भक्ति की मिठास और जीवन को संवारने वाले संदेश समाहित है। गुजरात, अहमदाबाद से आये श्रद्धालु, परमार्थ निकेतन, मां गंगा के पावन तट पर बैठकर आध्यात्मिक रसपान का आनंद ले रहे हैं।

कथा आयोजक श्रीमती करूणाबेन प्रागजी भाई पटेल और श्री प्रागजी भाई नारण भाई पटेल के मार्गदर्शन में अहमदाबाद, गुजरात सहित विभिन्न प्रदेशों से आए परिवारजन और मित्र इस पावन आयोजन में भाग लेने हेतु उपस्थित हुए।

प्रागजी भाई पटेल ने कहा कि कथा के प्रवाह में धर्म, भक्ति और ज्ञान का अनुपम मिश्रण है और परमार्थ निकेतन की पवित्र ऊर्जा, स्वच्छ व दिव्य वातावरण और धार्मिक माहौल कथा के प्रभाव को और भी गहरा बनाता है। यहां आकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव हो रहा हैं। पूज्य स्वामी जी के दर्शनों से हमारी यात्रा सार्थक व दिव्यता से युक्त हो गयी है।

परमार्थ निकेतन से सभी माताओं-बहनों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ हुये स्वामी जी ने कहा कि यह पावन व्रत नारी शक्ति के अटूट प्रेम, समर्पण और आस्था का प्रतीक है। इससे रिश्ते ही नहीं, दिल भी जुड़ते हैं। माँ पार्वती और भगवान शिव के आशीर्वाद से सभी के जीवन में सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहे।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस स्वामी जी ने कहा कि मन की शांति शरीर की सेहत जितनी ही जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य कोई कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक शक्ति का आधार है। अपने मन की बात कहना, समय पर सहायता लेना और सकारात्मकता अपनाना स्वयं की देखभाल का प्रतीक है। जैसे शरीर को पोषण चाहिए, वैसे ही मन को सुकून, ध्यान और प्रेम चाहिए। आइए आज संकल्प लें हम मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहेंगे, दूसरों को भी समझेंगे और एक संवेदनशील समाज का निर्माण करेंगे जहाँ हर मन को सम्मान और सहारा मिले।

कथा आयोजक श्रीमती करूणाबेन प्रागजी भाई पटेल, श्री प्रागजी भाई नारण भाई पटेल, विशाल, मितल, श्रेया, जैमिन, धरती, ईशान, निष्ठा, पिनाक और अहमदाबाद गुजरात से पधारे मित्र व परिवार जन मां गंगा जी गोद में बैठकर अध्यात्म ज्ञान गंगा का रसपान कर रहे हैं।

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