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कांग्रेस विधायको ने श्री पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड को जिला अधिकारी के माध्यम से बजट सत्र को कम से कम 3 सप्ताह के लिए चलने के लिए ज्ञापन सौंपा

कमल अग्रवाल (हरिद्वार) उत्तराखंड

जनपद हरिद्वार / कांग्रेस विधायको ने श्री पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड को जिला अधिकारी के माध्यम से बजट सत्र को कम से कम 3 सप्ताह के लिए चलने के लिए ज्ञापन सौंपा शीघ्र ही उत्तराखण्ड विधानसभा का बजट सत्र आयोजित होना है। देश के अन्य राज्यों की विधानसभाओं की तुलना में उत्तराखण्ड विधानसभा के सत्र बहुत कम समय के लिए आहूत किए जाते हैं जिससे राज्य की जनता से संबधित महत्वपूर्ण प्रश्न राज्य के सर्वोच्च सदन के सामने नहीं आ पाते हैं। प्रदेश के 70 विधायकगणों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र से संबधित प्रश्नों को प्रस्तुत कर सरकार का जबाव भी लेना होता है। राज्य में हाल ही में कानून व्यवस्था की स्थिति अपने न्यूनतम स्तर पर है, इस साल वन्य जीवों के आक्रमण से हर हिस्से में मानवीय क्षति हुई है। हर घर नल योजना के बाबजूद राज्य का हर हिस्सा पीने के पानी की समस्या से परेशान है।.पिछले साल राज्य के विभिन्न स्थानों में आपदाऐं आई हैं अभी तक आपदा पीड़ितों के पुर्नवास और मुआवजे की समस्याऐं खड़ी हैं। सरकार ने राज्य की सरकारी जमीनों की नीलामी के रास्ते खोल दिए हैं।

महोदय आपके अधीन राज्य के अधिकांश विभाग हैं। ये सभी महत्वपूर्ण विभाग हैं। विधानसभा में आपका दिन सोमवार को आता है। आपके मुख्यमंत्री रहते हुए पिछली विधानसभा(चतुर्थ विधानसभा) और अभी तक आहूत इस विधानसभा(पंचम विधानसभा) के किसी भी सत्र में सोमवार को प्रश्नकाल नहीं आया है और न ही विधाई कार्य हुए हैं। याने ‘‘ विधानसभा में जनता के अधिकारों और समस्याओं पर उठे सवालों का उत्तर देने में तथाकथित ’’धाकड’’ धामी असहज दिखाई देते हैं। जबकि उनके स्वयं के पास लगभग 40 विभाग है।

अतः आगामी बजट सत्र के संबध में निम्न निवेदन हैं –

1- प्रस्तावित बजट सत्र में सोमवार का दिन जिसमें प्रश्न काल और अन्य विधाई कार्य हों के साथ हो। बजट सत्र इस तरह आहूत किया जाय कि, कम से कम 3 सोमवार माननीय मुख्यमंत्री जी अपने द्वारा धारित विभागों से संबधित प्रश्नों को उत्तर प्रश्न काल में दें।

2- सरकार बार-बार विधाई कार्यों की कमी का रोना रोती है। जबकि राज्य में अभी भी कई कानून उत्तर प्रदेश के चल रहे हैं, राज्य में कई नियमावलियां भी उत्तर प्रदेश राज्य की चल रही हैं। इन कानूनों को उत्तराखण्ड के अनुसार बदला जाना आवश्यक है। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने राज्य के पंचायती राज एक्ट पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि, यदि आपके पास सही कानून बनाने के लिए अधिकारी या विशेषज्ञ नहीं है तो हम आपको प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी उपलब्ध कराते हैं । इतनी कड़ी टिप्पणी के बाद भी सरकार ने आज तक उत्तराखण्ड पंचायत राज एक्ट में सुधार नहीं किए हैं। ऐसे अनेक उदाहरण समय-समय पर सामने आते रहते हैं। उत्तराखण्ड की पांचवीं विधान सभा के इस काल में अभी तक सरकार ने सार्थक विधाई कार्य नहीं किए हैं। इसलिए सरकार को बचे हुए कुछ महिनों में महत्वपूर्ण विधाई कार्यों को करते हुए , एक्टों और नियमावलियों में सुधार करना चाहिए।

3 – राज्य में भ्रष्टाचार, महिलाओं पर उत्पीड़न, बड़ते हुए अपराध, वन्य जीवों के कारण मानव हानि, सरकारी जमीनों की चहेतों को बंदरबांट आदि दर्जनों ज्वलंत और तत्कालिक महत्व के मुद्दे हैं। इन सभी पर विधानसभा में चर्चा होनी आवश्यक है।

4- इन सभी प्रश्नों के उत्तर के लिए राज्य विधनसभा का बजट सत्र कम से कम 3 सप्ताह की समयावधि के लिए आहूत किया जाना चाहिए।

इस दौरान विधायक हाजी फुरकान अहमद जिला अध्यक्ष रुड़की ग्रामीण विधायक ममता राकेश विधायक अनुपमा रावत हारून चौधरी सागर बेनीवाल महरूफ सलमानी तबरेज आलम आदि लोग मौजूद रहे

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